उत्तराखंड की वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट जहां प्रदेश के कलाकारों के लिए खुशी लेकर आया तो वहीं कई विभागों का बजट कम होने से निराशा में बदल गया।
उत्तराखंड वासियों की प्यास बुझाने वाले जल संस्थान, स्वजल और पेयजल निगम को इस बार बजट में उम्मीद से कम रकम मिली है। तीनों विभागों ने 875 करोड़ के प्रस्ताव बनाए थे, लेकिन बजट 50 प्रतिशत कम 407 करोड़ रुपए मिला। यही नहीं, पिछले साल के मुकाबले भी बजट 167 करोड़ रुपए कम है।
पेयजल सेक्टर के लिए इस बार कम बजट मिलने से अधिकारी परेशान हैं, जबकि योजनाओं की सूची काफी लंबी है। जो बजट मिला है, उसमें भी 105 करोड़ रुपए गैर योजनागत हैं। यानी इस राशि से कर्मचारियों की पेंशन, ग्रेच्युटी, बिजली के बिल आदि दिए जाने हैं। बचे 302 करोड़ में करोड़ रुपए में 225 करोड़ पेयजल निगम के लिए, 40 करोड़ जल संस्थान ओर 37 करोड़ स्वजल को मिलने हैं।
पेयजल निगम मुख्यालय के मुख्य अभियंता सुनील कुमार ने बताया कि कम बजट के चलते नई योजनाओं पर काम करना नामुमकिन है। अब पुरानी योजनाओं में भी महत्वपूर्ण योजनाओं को छांटकर कार्य करना होगा।
नगरीय योजनाओं के लिए 40 करोड़
जल संस्थान को नगरीय पंपिग योजनाओं के पुर्नगठन, रखरखाव और जीर्णोद्धार के लिए 40 करोड़ रुपये मिले हैं। मुख्य महाप्रबंधक एसके गुप्ता ने बताया कि हमारा बजट पिछली बार से कम है। इसमें हैंडपंप के रख-रखाव, रिवर बैंक फिल्ट्रेशन आदि के कार्य शामिल हैं। वहीं गांव में पेयजल योजनाओं के लिए स्वजल को 37 करोड़ रुपये मिले हैं।
समय कम, काम ज्यादा
बजट में मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना (एमएसबीवाई) को एक अप्रैल से शुरू करने का वायदा दोहराया गया है। योजना के लिए कम समय मिलने पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी चिंतित है। दरअसल, जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे फिलहाल आधे परिवारों को ही योजना का फायदा मिलने की संभावना है।
योजना के तहत पात्र परिवारों को हर वर्ष 50 हजार रुपये की निशुल्क स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि योजना को लागू करने के लिए बहुत कम समय मिला है। विभाग के आकलन के मुताबिक, राज्य में 22 लाख परिवारों को योजना के लिए पात्र माना गया है।
एक फरवरी से विभाग ने आशा कार्यकत्रियों के जरिए इन परिवारों का डोर टू डोर सत्यापन कर फार्म भराने शुरू किए हैं। अभी छह लाख बीस हजार फार्म ही विभाग में जमा हो पाए हैं। कुछ जिलों के मुख्य चिकित्साधिकारियों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में कई दूरस्थ गांव होने की वजह से परिवारों के घर-घर सत्यापन में देरी हो रही है।
ये होंगे पात्र
आयकर के दायरे में न आते हों
सरकारी कर्मचारी या पेंशनर न हों
राज्य में इस योजना के तहत लगभग 22 लाख पात्र परिवार होने का आंकलन किया गया है। आशा कार्यकत्रियों के जरिए घर-घर जाकर सर्वे और फार्म भराए जा रहे हैं। इस कार्य की रोजाना जिला और महानिदेशालय स्तर पर समीक्षा हो रही है। लक्ष्य पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. जीएस जोशी, स्वास्थ्य महानिदेशक
अधूरी रह गई कर्मचारियों की आस
प्रदेश के बजट से राज्य कर्मचारियों को मायूसी हाथ लगी है। वेतन विसंगति, संविदाकर्मियों के नियमितीकरण सरीखे मुद्दों पर कर्मचारियों को तोहफा मिलने की आस थी, लेकिन यह उम्मीद अधूरी रह गई। उचाट कर्मचारी इसे घिसा-पिटा बजट मान रहे हैं।
मुख्य सचिव ने बजट की घोषणा के पहले ही कर्मचारी नेताओं को बता दिया था कि उनकी मुख्य मांगों के निराकरण के संबंध में कमेटियां गठित कर दी गई हैं। फिर भी कर्मचारियों को आस तो थी ही कि बजट में उनके लिए भी कुछ होगा। कर्मचारियों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग के मद्देनजर भी कुछ नहीं कहा गया।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रांतीय महामंत्री प्रदीप कोहली का कहना है कि जैसे मीडियाकर्मियों, अधिवक्ताओं के लिए व्यवस्था की गई है वैसे कर्मचारियों के लिए भी कुछ कर दिया जाता।
अधिकारियों और कर्मचारियों के इलाज के लिए अलग से व्यवस्था होनी चाहिए। अभी सीएमओ दफ्तर से डीजी के आफिस तक बिल भुगतान के लिए लोग दौड़ते रहते हैं, तब तक मरीज मर जाता है।
उत्तरांचल फेडरेशन आफ मिनिस्ट्रीयल सर्विसेस एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री सुनील दत्त कोठारी भी बजट से खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि बजट में कर्मचारियों के लिए कुछ तो किया जाना चाहिए था। प्रदेश में कामकाज तेज करने के लिए सरकार भत्तों का प्रावधान कर सकती थी। सातवें वेतन आयोग के मद्देनजर भी कुछ नहीं कहा गया।
ये थी उम्मीदें
- सरकारी कर्मचारियों के लिए आवासीय कालोनियों की व्यवस्था
- कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए नए मेडिकल कोष का गठन
- कर्मचारियों की सहायता के लिए अलग से कोष की स्थापना
- सालों से कार्यरत विभिन्न विभागों के संविदाकर्मियों का नियमितीकरण
- दुर्गम क्षेत्र भत्ता का प्रावधान
कला बचाने वालों को मिला सरकार का साथ
अपने हुनर के दम पर प्रदेश की लोककलाओं, गीतों, नृत्यों को संरक्षित रखने वाले कलाकारों को अब जरूरत के वक्त सरकार का साथ मिलेगा।
यह मिलेगी सहायता
- कलाकार के दुर्घटनाग्रस्त होने या आकस्मिक मृत्य होने पर परिवार को त्वरित आर्थिक सहायता के रूप में धनराशि प्रदान की जाएगी
- कलाकार के दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने तथा अपंगता की दशा में उपचार के लिए त्वरित आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी
- आपदा में कलाकार का भवन क्षतिग्रस्त या ध्वस्त होने पर एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी
- विभाग से सूचीबद्ध न होने वाले कलाकारों (जो किसी अन्य योजना से लाभान्वित नहीं हुए हैं) को वेशभूषा, वाद्ययंत्रों के लिए आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी
यह होगी चयन समिति
समिति अध्यक्ष संस्कृति विभाग के निदेशक होंगे। वित्त और नियोजन विभाग के अधिकारी, संस्कृति विभाग के सहायक निदेशक या क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, प्रदेश के ख्यातिलब्ध दो वरिष्ठ कलाकार, संस्कृति निदेशालय के लेखाकार या सहायक लेखाधिकारी समिति के सदस्य होंगे। समिति अध्यक्ष कुछ सदस्यों को नामित भी कर सकेंगे।