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Uttarakhand BJP: वरिष्ठ नेता नहीं चाहते थे महामंत्री अजय कुमार यहां रहें, राष्ट्रीय अध्यक्ष को दिया था फीडबैक

Wed, 03 Jun 2026 10:46 AM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

उत्तराखंड भाजपा के संगठन महामंत्री अजय कुमार को पार्टी ने राजस्थान का संगठन महामंत्री बना दिया। अजय कुमार ने करीब सात साल उत्तराखंड में काम किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष के तीन दिवसीय दौरे के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं ने अजय कुमार को लेकर अपना फीडबैक दिया था। पार्टी के ही वरिष्ठ नेता नहीं चाहते थे कि वह अब उत्तराखंड में रहे।

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संगठन महामंत्री अजय कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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उत्तराखंड में भाजपा के ही कई वरिष्ठ नेता नहीं चाहते थे कि अब संगठन महामंत्री अजय कुमार यहां रहें। लिहाजा, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तीन दिवसीय दौरे के दौरान उन वरिष्ठ नेताओं ने नवीन को अजय कुमार को लेकर अपना फीडबैक दिया था। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने भी माहौल की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अजय कुमार को यहां से हटाकर सम्मानजनक तरीके से राजस्थान भेज दिया।

बतौर संगठन महामंत्री अजय कुमार ने सितंबर 2019 को कमान संभाली थी। करीब सात साल से अजय कुमार संगठन को बहुत गहराई से समझ चुके थे। विवाद को छोड़ दें तो उनका ट्रैक रिकॉर्ड चुनावों के लिहाज से शानदार भी रहा। भाजपा ने पहले विधानसभा चुनाव, इसके बाद 2024 का लोकसभा चुनाव और फिर निकाय व पंचायत चुनावों में भाजपा का श्रेष्ठ प्रदर्शन किया।

बावजूद इसके पिछले कुछ दिनों से अंकिता भंडारी प्रकरण में अजय कुमार का नाम घसीटे जाने, राज्य में हुए घटनाक्रमों, सामाजिक ताने-बाने, जनभावनाओं को देखते हुए कहीं न कहीं कई वरिष्ठ नेता चिंतित थे। उन्हें ये भी चिंता थी कि कहीं आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को इसका नुकसान न हो। वो भी तब जबकि विपक्षी कांग्रेस और यूकेडी अंकिता भंडारी मामले को लगातार मुद्दा बनाए हुए हैं और कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी अलग से बात की

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अब राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने यहां आने के बाद पहले कोर कमेटी की बैठक ली। फिर मंत्रियों और अलग-अलग सांगठनिक शाखाओं की बैठकें कीं। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से भी अलग से बात की। पार्टी के ये वरिष्ठ नेता चाहते थे कि अजय कुमार ने लंबा समय यहां बिताया है। अब उनका यहां रहना ठीक नहीं है।

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अब नए महामंत्री संगठन के आने के बाद ये कुर्सी तो खाली है लेकिन इस पर चुनौतियां जरूर विराजमान हो गई हैं। अगला विधानसभा चुनाव सिर पर है तो आने वाले महामंत्री के लिए प्रदेश का सांगठनिक, भौगोलिक, सामाजिक और राजनीतिक हालातों को समझना होगा। 70 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक पकड़ बनाने, यहां के नेताओं को समझने, जनभावनाओं को ठीक से समझने की भी चुनौती होगी।

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