देहरादून में भाजपा महानगर इकाई में कुछ दिन की शांति के बाद फिर गुटबाजी की सुगबुगाहट है। गुटबाजी की वजह क्षेत्र में ‘वर्चस्व’ की जंग मानी जा रही है। कई नेता संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं, जबकि खुद के स्पांसर कार्यक्रमों, जनसंपर्क अभियानों में उनकी सक्रियता ज्यादा है।
इस पूरी पैंतरेबाजी को चुनावी साल से जोड़कर देखा जा रहा है। महानगर भाजपा में पिछले साल नवंबर में मंडल अध्यक्षों से शुरू हुआ आपसी घमासान महानगर अध्यक्ष बनने और कार्यकारिणी विस्तार तक खुलेआम चलता रहा। नारी निकेतन, नैनीसार और फिर जेएनयू प्रकरण के बहाने कार्यकर्ताओं ने सरकार के विरोध में एकजुटता दिखाई। इससे पार्टी की आपसी गुटबाजी में जरूर कुछ ठहराव आया, लेकिन अब फिर नेताओं की महत्वाकांक्षा फिर उछाल मारने लगी है।
विधायकी की दावेदार और उनके खेमे के कार्यकर्ता संगठन के बजाय खुद के स्पांसर कार्यक्रम ज्यादा कर रहे हैं। धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रकाश सुमन ध्यानी, महेश पांडे के हालिया कार्यक्रमों में इसकी झलक दिखी भी थी। इस सीट के पंडित दीनदयाल नगर मंडल की कार्यकारिणी पर लगी रोक आग में घी का काम कर रही है।
राजपुर विधानसभा क्षेत्र में भगवत प्रसाद मकवाना, जीवन सिंह व अमर सिंह स्वेडिया आदि नेताओं की सक्रियता भी कुछ ऐसे ही संकेत दे रही है। राजपुर मंडल के अध्यक्ष विशाल गुप्ता और अन्य कुछ कार्यकर्ताओं की दूरी बनाने को पार्टी के सूत्र इसी का नतीजा बताते हैं। यही स्थिति कैंट विधानसभा के अधीन आने वाले जीएमएस नगर मंडल की है।
यहां के मौजूदा विधायक और वरिष्ठ भाजपा नेता हरबंस कपूर, अमित कपूर, जोगेंद्र सिंह पुंडीर, राजेंद्र सिंह ढिल्लो अपने-अपने हिसाब से जनता से जुड़े मसलों पर सक्रिय दिखाई देते हैं। शहर भाजपा में अधिक सक्रिय नजर आने वाले एक नवनियुक्त प्रांतीय पदाधिकारी के पार्टी लाइन से अलग तरह के बधाई होर्डिंग को भी कुछ कार्यकर्ता अनुशासन के चश्मे से देख रहे हैं।
हालांकि, भाजपा महानगर अध्यक्ष उमेश अग्रवाल गुटबाजी से इनकार कर रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ मामलों को देखते हुए तीन सदस्यीय अनुशासन समिति गठित की गई है, जो गुटबाजी और संगठन के कार्यक्रमों से दूरी बनाने वालों पर नजर रखेगी।