प्रदेश अध्यक्ष का मनोनयन संभव
माना जा रहा है कि मंडल और जिलाध्यक्षों की घोषणा के एक हफ्ते बाद प्रदेश अध्यक्ष तय हो जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष के मनोनीत होने की ज्यादा संभावना है। दरअसल, उत्तराखंड में निकाय चुनाव और दिल्ली में विधानसभा चुनाव के कारण संगठन चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। लेकिन बाकी प्रदेश में प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है। पार्टी के संविधान के मुताबिक, राज्यों में चुनाव की 50 फीसदी प्रक्रिया पूरी होने पर राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव हो सकता है। बताया जा रहा है कि फरवरी के आखिरी हफ्ते तक भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव कर सकती है। राष्ट्रीय अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय कर देगी।
भट्ट के रिपीट होने की चर्चा, ये भी दावेदारों में
पार्टी के भीतर गरमा रही चर्चा के मुताबिक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पद पर महेंद्र भट्ट को रिपीट भी कर सकती है। यदि भट्ट रिपीट नहीं हुए तो भाजपा अपनी राजनीतिक परंपरा के अनुरूप जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के हिसाब से संगठन की कमान गढ़वाल के किसी ब्राह्मण चेहरे को सौंपेगी। हालांकि, पार्टी के भीतर चर्चा एक यह भी है कि इस बार दलित या ओबीसी चेहरे को बागडोर सौंप कर नया प्रयोग भी किया जा सकता है। ऐसे में ब्राह्मण चेहरे के तौर पर पार्टी में पार्टी के प्रदेश महामंत्री आदित्य कोठारी, विधायक विनोद चमोली समेत कुछ और नामों की चर्चा है। दलित चेहरे के तौर पर विधायक खजान दास का नाम सबसे आगे है। यदि पार्टी ने महिला चेहरे को कमान सौंपने का प्रयोग किया तो केदारनाथ विधायक आशा नौटियाल और महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव दीप्ति रावत का नाम पर विचार हो सकता है।