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उत्तराखंड आयुर्वेद विवि: 60 बेड का अस्पताल हो गया वीरान

Thu, 04 Oct 2018 03:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 60 बेड का अस्पताल वीरान हो गया है। पुलिस ने अस्पताल का पूरा सामान जब्त कर लिया है। अब छात्रों के पढ़ने के लिए विवि में न तो पैथोलॉजी लैब है और न ही फिजियोलॉजी व एनाटमी लैब।

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आयुर्वेद विवि को सीसीआईएम की मान्यता मिलने के लिए 60 बेड का अस्पताल जरूरी था। इस अस्पताल में पूरा स्टाफ और सामान भी दिखाया गया था। अस्पताल का सामान बृहस्पतिवार को पुलिस ने जब्त कर लिया। सामान जब्त होने के साथ ही अस्पताल वीरान हो गया है। पुलिस ऑपरेशन थियेटर, फिजियोलॉजी लैब, एनाटमी लैब और पैथोलॉजी लैब का पूरा सामान केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त कर ले गई है। यहां तक कि अस्पताल में अब एग्जामिनेशन टेबल और स्टेथोस्कोप भी नहीं बचा है। सवाल खड़ा हो रहा है कि जो छात्र विवि में पढ़ रहे हैं, उनकी पढ़ाई का क्या होगा? वह अपनी तैयारी कैसे कर पाएंगे? अस्पताल में कोई सामान न होने से आने वाले दिनों में विवि की सीसीआईएम की मान्यता भी खतरे में आ जाएगी।

उत्तराखंड आयुर्वेद विवि हर्रावाला के अस्पताल का पूरा सामान पुलिस ने बृहस्पतिवार को जब्त कर लिया। इसमें फर्नीचर व मेडिकल उपकरणों सहित करीब 300 वस्तुएं शामिल हैं। यह सामान जुलाई में तत्कालीन कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा सहित तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे से संबंधित है। आरोप है कि विवि के लिए खरीदे गए इस सामान का भुगतान नहीं किया गया था। 
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न्यायालय ने यह सभी सामान माल मुकदमाती (केस प्रॉपर्टी) के तौर पर जब्त करने के आदेश भी दिए। लिहाजा पुलिस इसकी जब्ती के लिए पि

छले दिनों विवि पहुंची तो वहां प्रशासन के कुछ कर्मचारियों ने झगड़ा शुरू कर दिया। पुलिस ने कुलसचिव से बात की तो उन्होंने कुछ दिन का समय मांगा। इसके बाद पुलिस वहां से खाली हाथ लौट आई। अब बृहस्पतिवार को हर्रावाला चौकी प्रभारी बृजपाल सिंह की टीम फिर से इस सामान को जब्त करने के लिए दोपहर करीब एक बजे विवि पहुंची। यहां उन्होंने वार्ड, लैब, ऑफिस आदि जगहों से करीब 300 वस्तुओं को अपने कब्जे में ले लिया। एसपी ग्रामीण सरिता डोभाल ने बताया कि पुलिस देर रात इस सामान को लोडर में भरकर हर्रावाला चौकी ले आई। सामान की सूची कोर्ट में पेश की जाएगी।
 
 

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यह है मामला

गौरतलब है कि वर्ष 2016 में आयुर्वेद विवि हर्रावाला की मान्यता की प्रक्रिया चल रही थी। आरोप है कि इसी बीच विवि के कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा ने कारोबारी सुधीर पांडेय को फोन कर विवि बुलाया था। मिश्रा ने पांडेय से कहा कि विवि की मान्यता के लिए सेंट्रल काउंसिल फॉर द इंडियन मेडिसिन(सीसीआईएम) की टीम निरीक्षण के लिए पहुंच रही है। इसके लिए विवि में जरूरी फर्नीचर, मेडिकल उपकरण व अन्य सामान होना जरूरी है।

टीम के जाने के बाद उन्हें भुगतान कर दिया जाएगा। पांडेय ने मिश्रा की बातों में आकर उन्हें करीब 65 लाख रुपये का जरूरी साजो-सामान उपलब्ध करा दिया गया।

निरीक्षण हो गया और मान्यता भी मिल गई, लेकिन पांडेय को भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में पांडेय ने संबंधित विभागों और पुलिस को इसकी शिकायत की, मगर उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद पांडेय ने अदालत की शरण ली तो दो जुलाई 2018 को इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए। इसके बाद मृत्युंजय मिश्रा, मिश्रा के पीए विवेक जोशी व स्टोरकीपर विवेक तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
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