उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 60 बेड का अस्पताल वीरान हो गया है। पुलिस ने अस्पताल का पूरा सामान जब्त कर लिया है। अब छात्रों के पढ़ने के लिए विवि में न तो पैथोलॉजी लैब है और न ही फिजियोलॉजी व एनाटमी लैब।
आयुर्वेद विवि को सीसीआईएम की मान्यता मिलने के लिए 60 बेड का अस्पताल जरूरी था। इस अस्पताल में पूरा स्टाफ और सामान भी दिखाया गया था। अस्पताल का सामान बृहस्पतिवार को पुलिस ने जब्त कर लिया। सामान जब्त होने के साथ ही अस्पताल वीरान हो गया है। पुलिस ऑपरेशन थियेटर, फिजियोलॉजी लैब, एनाटमी लैब और पैथोलॉजी लैब का पूरा सामान केस प्रॉपर्टी के तौर पर जब्त कर ले गई है। यहां तक कि अस्पताल में अब एग्जामिनेशन टेबल और स्टेथोस्कोप भी नहीं बचा है। सवाल खड़ा हो रहा है कि जो छात्र विवि में पढ़ रहे हैं, उनकी पढ़ाई का क्या होगा? वह अपनी तैयारी कैसे कर पाएंगे? अस्पताल में कोई सामान न होने से आने वाले दिनों में विवि की सीसीआईएम की मान्यता भी खतरे में आ जाएगी।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि हर्रावाला के अस्पताल का पूरा सामान पुलिस ने बृहस्पतिवार को जब्त कर लिया। इसमें फर्नीचर व मेडिकल उपकरणों सहित करीब 300 वस्तुएं शामिल हैं। यह सामान जुलाई में तत्कालीन कुलसचिव मृत्युंजय मिश्रा सहित तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुए मुकदमे से संबंधित है। आरोप है कि विवि के लिए खरीदे गए इस सामान का भुगतान नहीं किया गया था।
न्यायालय ने यह सभी सामान माल मुकदमाती (केस प्रॉपर्टी) के तौर पर जब्त करने के आदेश भी दिए। लिहाजा पुलिस इसकी जब्ती के लिए पि
छले दिनों विवि पहुंची तो वहां प्रशासन के कुछ कर्मचारियों ने झगड़ा शुरू कर दिया। पुलिस ने कुलसचिव से बात की तो उन्होंने कुछ दिन का समय मांगा। इसके बाद पुलिस वहां से खाली हाथ लौट आई। अब बृहस्पतिवार को हर्रावाला चौकी प्रभारी बृजपाल सिंह की टीम फिर से इस सामान को जब्त करने के लिए दोपहर करीब एक बजे विवि पहुंची। यहां उन्होंने वार्ड, लैब, ऑफिस आदि जगहों से करीब 300 वस्तुओं को अपने कब्जे में ले लिया। एसपी ग्रामीण सरिता डोभाल ने बताया कि पुलिस देर रात इस सामान को लोडर में भरकर हर्रावाला चौकी ले आई। सामान की सूची कोर्ट में पेश की जाएगी।