देवी मां की कृपा थी जो मैं बच गई
एक टेंट बच गया था। उसमें कोई नहीं था। मैंने उस टेंट में जाकर पानी गर्म किया। किसी की पसली व हड्डी टूटी थी। किसी के सिर में चोट थी, किसी की टांग टूट गई, कुछ सदमें में थे। मेरे भी सिर में चोट थी, जिसे में बार-बार दबा रही थी, लेकिन अन्य की चोट देखकर लगा मेरी चोट कुछ नहीं है। यह एवलांच नजदीक से आया था, यदि दूर से आया होता तो कोई नहीं बचता। सोचा भगवान ने बचा लिया तो आगे बढ़ना है। इस सोच ने मुझे सकारात्मक ऊर्जा दी। अगले दिन सुबह पांच बजे सिलिपिंग बैग में लपेटकर घायलों को इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया। इस हादसे के बाद मुझे छोड़कर सभी लौट गए। देवी मां की कृपा थी जो मैं बच गई। मैंने चढ़ाई जारी रखी और एवरेस्ट फतह किया।
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ऑक्सीजन की कमी से लगने लगती है थकान
दस हजार फीट से ऊपर ऑक्सीजन कम हो जाती है और जल्दी थकान लगने लगती है। उत्तरकाशी के मामले में पर्वतारोही कितने नीचे दबे हैं इस पर निर्भर करता है। यहां प्रशिक्षण दिया जा रहा था, इसलिए उन लोगों के पास ऑक्सीजन सिलिंडर भी नहीं होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि पर्वतारोही दल में कम लोग होते हैं। जबकि प्रशिक्षण में अधिक लोग शामिल होते हैं। यही वजह है कि इतने अधिक लोग प्रभावित हुए हैं।