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उत्तराखंड विस शीतकालीन सत्र 2021: सदन के दूसरे दिन शुक्रवार को 1353 करोड़ का अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश

Fri, 10 Dec 2021 07:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

गुरुवार से शुरू हुए सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को सरकार अपना कामकाज निपटाएगी। सदन में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक 2021 समेत आठ विधेयक पटल पर रखेगी।
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उत्तराखंड विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को वित्तीय वर्ष 2021-22 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश किया। सत्र के दौरान प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए 1353 करोड़ 79 लाख आठ हजार रुपये का दूसरा अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। वित्त मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अनुपूरक बजट पेश करना था। लेकिन उनके सीडीएस जनरल बिपिन रावत की अंतिम यात्रा में शामिल होने की व्यस्तता के चलते शुक्रवार को संसदीय कार्यमंत्री बंशीधर भगत ने सदन पटल पर अनुदान मांगें रखी। शनिवार को अनुपूरक बजट पास होगा।

एनसीसी कैडेट्स ने देखी सदन की कार्यवाही

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन 32 एनसीसी कैडेट्स ने दर्शक दीर्घा में बैठकर सदन की कार्यवाही देखी। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने सदन में पीठ से सदस्यों को एनसीसी कैडेट्स का परिचय कराकर कैडेट्स का उत्साहवर्धन किया। 

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अनुपूरक मांगों के तहत राजस्व लेखा में 1168 करोड़ 90 लाख 82 हजार रुपये और पूंजी लेखा में 184 करोड़ 88 लाख 26 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। कुल 11 अनुदान मांगों में सबसे अधिक 668 करोड़ 36 लाख रुपये का प्रावधान राजस्व एवं सामान्य प्रशासन की मद में किया गया है। इससे एसडीआरएफ, आपदा राहत निधि के खर्च की प्रतिपूर्ति होगी।

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210 करोड़ 28 लाख की व्यवस्था वित्त, कर, नियोजन, सचिवालय व अन्य सेवाओं के लिए की गई है।  यह धनराशि राज्य विकास ऋणों को अंतरितर करने, रेजीडेंट कमीश्नर नई दिल्ली अधिष्ठान और  पर्यावरण निदेशालय के लिए व्यय होगी। ग्राम्य विकास विभाग के लिए 104.67 करोड़ की व्यवस्था की गई है, जिसके तहत पीएमजीएसवाई की सड़कों की मरम्मत और विधायक निधि के लिए धनराशि की प्रतिपूर्ति होगी। सूचना के लिए 104 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
 
लोक निर्माण विभाग के लिए 150 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे प्रदेश के मार्गों व पुलियों की मरम्मत, व राज्य सेक्टर की चालू निर्माण योजनाओं के काम होंगे। परिवहन के लिए 13 करोड़ 88 लाख 26 हजार रुपये का प्रावधान है, जिससे उत्तराखंड परिवहन के ऋण की प्रतिपूर्ति होगी।

पांच विभागों में पूंजीगत व्यय प्रावधान

ग्राम्य विकास में 54.67 करोड़, लोनिवि में 100 करोड़, परिवहन में 13 करोड़ 88 लाख 26 हजार, अनुसूचित जतियों का कल्याण में 13.49 र्को, और अनुसूचि जनजाति कल्याण के लिए 2.84 करोड़ का प्रावधान पूंजीगत मद में किया गया है।  

किस मद कितनी धनराशि

विभाग          -  बजट राशि(हजार में)
न्याय प्रशासन                -    17165
राजस्व एवं सामान्य प्रशासन- 6683600
वित्त, कर, नियोजन सचिवालय व अन्य सेवाएं  -2102800
शिक्षा, खेल व युवा कल्याण व संस्कृति   -2500
सूचना                        -             1040000
कल्याण योजनाएं          -          838000
ग्राम्य विकास              -    1046700
लोक निर्माण            -    1500000
परिवहन             -         138826
अनुसूचित जाति कल्याण  -   138587
अनुसूचित जनजातियों का कल्याण -  29730
योग                   -           13537908
............................................................

 

अनुपूरक बजट के मुख्य प्रावधान

-668.36 करोड़ का प्रावधान आपदा राहत निधि के तहत एसडीआएफ के लिए
-10 करोड़ का पर्यावरण निदेशालय के अंतर विभागीय व्यय एवं सब्सिडी
-80 करोड़ नंदा गौरा योजना के लिए
-50 करोड़ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों की मरम्मत के लिए
-100 करोड़ लोनिवि की राज्य सेक्टर की चालू सड़कों के निर्माण के लिए

सदन के पटल पर पेश हुए ये बिल

- उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन निरसन विधेयक 2021
- उत्तराखंड पंचायती राज द्वितीय संशोधन विधेयक 2021
- आम्रपाली विश्वविद्यालय के विधेयक 2021
- उत्तराखंड नजूल भूमि प्रबंधन व्यवस्थापन एवं निस्तारण विधेयक 2021
- सोसाइटी रजिस्टरीकरण उत्तराखंड संशोधन विधेयक 2021
- उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश) लोक सेवा (अधिकरण) (संशोधन) विधेयक 2021
- उत्तराखंड सिविल विधि संशोधन विधेयक 2021
- उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी, (विकास एवं विनियमन) पुनर्जीवित विधेयक 2021

ये विधेयक बने अधिनियम

उत्तराखंड विनियोग (2021-22 का अनुपूरक) विधेयक 2021, आईएमएस यूनिसन विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2021,  डीआईटी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक 2021, हिमालयन गढ़वाल विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2021, उत्तराखंड माल एवं सेवाकर (संशोधन) विधेयक 2021, उत्तराखंड फल पौधशाला (विनियमन) (संशोधन) विधेयक 2021, उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों के लिए विशेष प्रावधान (संशोधन) विधेयक 2021 और उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद अधिनियम 1995) (संशोधन) विधेयक 2021 अधिनियम बनें। 

तय समय में सभी प्रश्नों का उत्तर मिलने का बना रिकॉर्ड 

विधानसभा शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन एक बार फिर प्रश्नकाल के दौरान सदन में सदस्यों की ओर से पूछे गए सभी तारांकित प्रश्नों को निश्चित समय अवधि में उत्तरित किया गया। सदन में 27 वीं बार ऐसा हुआ है कि सदन में सभी तारांकित प्रश्नों को उत्तर मिला है। जो सदन की कार्रवाई में रिकॉर्ड है। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में पीठ से सभी सदस्यों का सहयोग के लिए धन्यवाद भी व्यक्त किया। 

उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन शुक्रवार को विपक्ष ने रोजगार के प्रश्न पर सरकार के जवाब से नाराज होकर सदन से वॉकआउट कर दिया। सदन में विपक्ष ने कार्यस्थगन प्रस्ताव लाकर कर्मचारियों, कानून व्यवस्था और नंदा गौरा योजना के मुद्दे पर हंगामा काटा और सरकार को घेरने की कोशिश की। प्रश्नकाल के दौरान बेरोजगारी के प्रश्न पर रोजगार के आंकड़ों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। कौशल विकास एवं सेवायोजन मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने सदन को अवगत कराया कि सरकार ने 2017 से 31 जनवरी 2021 तक सरकार ने सात लाख बेरोजगारों को रोजगार दिया है। 

नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार रोजगार के आंकड़ों पर सदन और बेरोजगारों को भ्रमित कर रही है। 22 दिसंबर 2020 को सदन में सरकार ने विपक्ष के कार्यस्थगन प्रस्ताव पर जवाब दिया था कि प्रदेश में 10 लाख लोगों को रोजगार दिया गया। जबकि चार मार्च 2021 को सदन में सरकार ने सात लाख को रोजगार देने की बात कही थी। एक तरफ सरकार रोजगार देने के दावे कर रही है। दूसरी तरफ सरकार के रोजगार आंकड़ों में अंतर है। 

 

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विपक्ष हमले को तो सरकार पलटवार को तैयार

उत्तराखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र खासा गरम हो सकता है। सत्तापक्ष और विपक्ष ने पूरी तैयारी कर ली है। सदन में विपक्ष महंगाई, रोजगार, किसान, लोकायुक्त, कानून व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोलेगा। देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम को समाप्त करने का प्रदेश सरकार ने बेशक निर्णय ले लिया है, लेकिन विपक्ष इस मसले को उठाकर सकार को असहज करने का प्रयास करेगा। साथ ही गैरसैंण, भू कानून और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी विपक्ष की सरकार को घेरने की तैयारी है।

उधर, विपक्ष के हमले को लेकर चौकन्नी सरकार ने भी हर मुद्दे पर पलटवार की तैयारी की है। सत्ता पक्ष की बागडोर पार्टी के सभी वरिष्ठ मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों के कंधों पर होगी। दो दिन की छोटी सी अवधि के सत्र में सरकार भी अपने पांच साल की उपलब्धियों और हाल ही में लिए गए लोक हित के फैसलों के जरिये विपक्ष के हमलों की धार को कुंद करने का प्रयास करेगी। इसके अलावा नेता सदन पुष्कर सिंह धामी भी सदन के भीतर कुछ नई घोषणाओं से जवाब दे सकते हैं।

प्रदेश सरकार के हाल ही में पलटे गए फैसलों के जरिये विपक्ष हमला बोलेगा। नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने इसके संकेत दिए हैं। उनके मुताबिक, प्रदेश भाजपा सरकार रोल बैक सरकार के तौर पर जानी जाएगी। पिछले पांच साल में इस सरकार ने अपने ही लिए गए फैसले पलटने का काम किया है।  लोकायुक्त बिल लाई और खुद ही प्रवर समिति को भेज दिया। गैरसैंण में कमिश्नरी बनाने की घोषणा की, उसे वापस ले लिया। देवस्थानम प्रबंध बोर्ड बनाया, उसे भी भंग करने का फैसला कर लिया। जिला प्राधिकरणों बनाए, उनके लिए भी कमेटी बना दी। भू कानून बनाया उसे भी वापस लेने के लिए कमेटी के हवाले कर दिया।

भाजपा से कांग्रेस में गए पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य के काफिले पर पिछले दिनों बाजपुर में हुए हमले को मुद्दे को भी विपक्ष कार्यस्थगन प्रस्ताव में उठाने की तैयारी में है। गैरसैंण पर भी सदन गरमा सकता है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार से पिछले पांच साल में अवस्थापना कार्य के नाम पर उठाए गए कदमों का हिसाब मांग सकता है। गैरसैंण से बदलकर सत्र देहरादून में किए जाने को भी विपक्ष मुद्दा बना सकता है।

हमें पूरी आशा है कि सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चलेगी और सदस्य अपने विषयों को प्रमुखता से उठाएंगे और उन पर चर्चा करेंगे। सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने सदन की कार्यवाही में पूरा सहयोग करने का आश्वासन दिया है। सरकार विपक्ष के सभी प्रश्नों और विषयों का संतोषजनक ढंग से उत्तर देने का पूरा प्रयास करेगी।
- बंशीधर भगत, संसदीय कार्यमंत्री

विपक्ष के पास मुद्दों की कमी नहीं है। सत्र की अवधि बहुत सीमित है, जबकि विषय काफी ज्यादा हैं। फिर भी हमारी कोशिश अधिक से अधिक मुद्दों को सदन में उठाने की होगी। महंगाई, बेरोजगारी, किसानों की ऋण माफी, कोरोना महामारी, लोकायुक्त, कानून व्यवस्था, देवस्थानम बोर्ड, गैरसैंण व भू कानून, कर्मचारियों की हड़ताल जैसे प्रमुख विषय हैं, जिन्हें कार्यस्थगन व अन्य नियमों के तहत उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे।
- प्रीतम सिंह, नेता प्रतिपक्ष 

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