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उत्तराखंड विस शीतकालीन सत्र 2020: वर्चुअल आयोजन पर शुरू हुई रार, विपक्ष को स्वीकार नहीं

Thu, 03 Dec 2020 10:23 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • विधानसभा अध्यक्ष ने कहा- पहले की तरह ही होगा
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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड  विधानसभा के लिए इस बार वर्चुअल सत्र का आयोजन आसान नहीं होगा। विपक्ष के कई विधायक पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार वर्चुअल सत्र के लिए तैयार नहीं हैं। उधर, विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और इस कारण सत्र पहले जैसा ही होगा।

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विधानसभा सत्र तीन दिन का है। पिछली बार सितंबर माह में प्रदेश सरकार ने कोविड को देखते हुए मात्र एक दिन का सत्र ही आयोजित किया था। इस एक दिन के सत्र में वर्चुअल का अनुभव अधिकतर सत्ता पक्ष के विधायकों ने बेहतरीन ही बताया था।


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नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश और कांग्रेस दल के उपनेता करन माहरा कोविड पॉजिटिव होने के कारण सत्र में भाग नहीं ले पाए थे। कांग्रेस के अन्य विधायक इस व्यवस्था से खुश नहीं थे। खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल भी कोविड पॉजिटिव होने के कारण सत्र में शामिल नहीं हुए थे और विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान को सभापति का दायित्व निभाना पड़ा था। 

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वर्चुअल भी मजबूरी, सभा मंडप में जगह कम

यह भी सच है कि विधानसभा के लिए सामाजिक दूरी के नियम के कारण वर्चुअल सत्र कराना भी मजबूरी ही है। सदन में छह गज की दूरी से कुल 42 सदस्यों के लिए ही व्यवस्था हो पा रही है।

वह भी दर्शक दीर्घा, अधिकारी कक्ष का उपयोग करने के कारण। विधानसभा के 70 सदस्य हैं। इस बार सल्ट की एक सीट खाली है। नामित सदस्य को मिलाते हुए विधानसभा को फिर भी 70 के लिए ही व्यवस्था करनी है।

तीन दिन का विधानसभा सत्र इस बार भी सामाजिक दूरी का पालन करते हुए, वर्चुअल और सभा मंडप में कुछ विधायकों की उपस्थिति की व्यवस्था के तहत आयोजित किया जाएगा। इस बार तीन दिन का सत्र है तो तैयारी भी अधिक ही रखनी होगी। बीच में कोरोना का संक्रमण कुछ कम हुआ था लेकिन अब फिर संक्रमण बढ़ने की जानकारी मिल रही है। विधानसभा में प्रवेश करने वालों के कोविड टेस्ट होंगे।
-प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष

मैं पिछली बार कोविड पॉजिटिव होने के कारण सत्र में शामिल ही नहीं हो पाया था। जहां तक वर्चुअल सत्र का सवाल है, मैं और अन्य कई विधायक इसके पक्ष में नहीं है। जब अनलॉक का दौर है और बाकी सब जगह छूट दी जा रही है तो विधानसभा के लिए ही यह कायदा क्यूं। हम इसका विरोध करेंगे और परंपरागत रूप से सदन को आहूत करने पर जोर देंगे। 
-करन माहरा, उप नेता कांग्रेस विधायक दल
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