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उत्तराखंड विधान सभा सत्रः चारधाम श्राइन प्रबंधन बिल पर विपक्ष का हंगामा, अनुपूरक बजट पास

Tue, 10 Dec 2019 10:16 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • वैल में आकर कांग्रेस विधायकों का धरना, प्रदर्शन व नारेबाजी, नारायण-नारायण का भी किया जाप
  • हल्ले-गुल्ले के बीच बगैर चर्चा सरकार ने पारित कराए छह अहम विधेयक
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड श्राइन प्रबंधन विधेयक 2019 को लेकर सोमवार को विपक्ष ने विधानसभा में खूब हंगामा काटा। हंगामे के चलते प्रश्नकाल नहीं चला और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को सात बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने वैल में आकर जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। स्पीकर के अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर नहीं बैठे और वैल में ही धरने पर बैठ गए।

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वहीं विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच प्रदेश सरकार ने बगैर चर्चा के उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुविधा (आवासीय एवं सुविधाएं) विधेयक, 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। ये विधेयक लाकर सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ी राहत दी है। उन पर सरकारी दरों से 25 प्रतिशत अधिक आवास किराया दरें लागू होंगी।

उनका आरोप था कि सरकार गुपचुप ढंग से श्राइन प्रबंधन बिल सदन में ले आई और विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया गया। विपक्ष अड़ गया कि जब तक सरकार विधेयक को वापस नहीं लेगी या उसे प्रवर समिति की नहीं भेजेगी, उसका विरोध जारी रहेगा। शोर शराबे के बीच सरकार ने श्राइन प्रबंधन विधेयक समेत दो बिल पेश किए और भोजनावकाश के बाद ध्वनिमत से 2533.90 करोड़ रुपये की अनुपूरक अनुदान मांगें समेत कुल छह विधेयक पारित कर दिए।  
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इससे पूर्व सोमवार को जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने खेद जताया कि विपक्ष को विश्वास में लिए बिना कार्यसूची में चारधाम श्राइन प्रबंधन विधेयक को पेश कर दिया गया। कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी इसके बारे में चर्चा नहीं हुई। उन्हें व कांग्रेस सदस्यों को बिल की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने बिल वापस लेने की मांग की।

इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार चर्चा करने को तैयार है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष किस नियम के तहत ये मामला उठा रही हैं? उनके इतना कहते ही कांग्रेस विधायक मनोज रावत वैल में आ गए। उनके पीछे विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, करन माहरा, हरीश धाम, राजकुमार, फुरकान अहमद, ममता राकेश व आदेश गुप्ता भी वैल पहुंच गए। बाद में विधायक प्रीतम सिंह भी विरोध में शामिल हो गए।

नारायण-नारायण का जाप

 ‘धर्म विरोधी सरकार नहीं चलेगी’, ‘धर्म का जो अपमान करेगा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा’ नारे लगा रहे थे। उन्होंने नारायण-नारायण का जाप करना भी शुरू कर दिया। उन्होंने जय बदरी विशाल और जय केदारनाथ के जयकारे भी लगाए। बार-बार अपील पर जब कांग्रेस विधायक नहीं मानें तो स्पीकर ने सदन की कार्यवाही पहले 11.15 बजे तक स्थगित कर दी। उसके बाद  कार्यवाही बाधित होने पर 11.30,  11.40, 12.20, 12.30 इस दौरान हंगामे के बीच  सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक व चारधाम श्राइन प्रबंधन विधेयक पटल पर पेश कर दिया।

इस बीच स्पीकर के चैंबर में सदन चलाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष और संसदीय कार्यमंत्री की मंत्रणा हुई, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। विपक्ष का विरोध जारी रहा। स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष को कार्यस्थगन की सूचना पर बात कहने को कहा तो उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया कि आज केवल श्राइन बोर्ड का मामला उठाएंगे। माहौल शांत न होने पर स्पीकर ने 1.20 बजे सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

भोजनावकाश के बाद जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो विपक्षी सदस्य फिर वैल में आ गए। सरकार ने शोरगुल के बीच छह महत्वपूर्ण विधेयक बगैर चर्चा के ध्वनिमत से पारित करा दिए। इतना ही नहीं हल्ले गुल्ले के बीच अनुपूरक अनुदान मांगें भी ध्वनिमत से पारित करा दी गई। इसके बाद 3.44 बजे स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया।

इनका क्या कहना है...

आपने कैसे जान लिया कि सरकार बिना चर्चा के बिल पास कराना चाहती है। केवल इस कारण से विरोध करेंगे कि आपके नेता ने कहा कि हाउस नहीं चलने दिया जाए। ये प्रदेश की जनता का अपमान है व उनके पैसों का दुरुपयोग है। विपक्ष के मित्र चर्चा के लिए आएं। सरकार चर्चा का हर जवाब देने को तैयार है। जो बिल सदन पटल पर आते हैं, वे कार्यमंत्रणा की बैठक में कभी नहीं आते। विपक्ष बिना नियम के अपनी बात कह रहा है, जो उचित नहीं है। आज की तारीख में जितने लोग हैं, उतने नेता प्रतिपक्ष हैं। - मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री

सरकार बदनीयती से चारधाम श्राइन प्रबंधन बिल लाई है। उसने हमें विश्वास में नहीं लिया। वह हमें सुनने को तैयार ही नहीं है। विपक्ष को बिल तक उपलब्ध नहीं कराए गए। गुपचुप ढंग से बिल लाया जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों का अपमान किया जा रहा है। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक सरकार बिल वापस नहीं लेगी, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा। - डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष

सरकार के सिर पर अहंकार बैठ गया है। चारधाम से जुड़े लोग सड़कों पर हैं। सुबह से विपक्षी विधायक सदन में विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने बिल सदन में पुर:स्थापित किया। सरकार की मंशा पर शक है। उसने नासमझी वाला निर्णय लिया है। नादान और अज्ञानी लोगों के हाथों में सरकार है। जिस तरह नोटबंदी और जीएसटी से देश में आपदा और विप्लव आया है, ठीक उसी तरह आपदा व विप्लव श्राइन बोर्ड विधेयक पारित होने के बाद धार्मिक और आर्थिक क्षेत्र में आएगा। - मनोज रावत, कांग्रेस विधायक, केदारनाथ

ये दुख की बात है कि विधेयक के सदन पटल पर आने से पहले ही विरोध शुरू कर दिया गया। यह अच्छी परंपरा नहीं है। विधेयक पर चर्चा होनी चाहिए। बहुत सारे विषय हैं। कई मंदिर इसके दायरे में लाए गए हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार और अन्य स्थानों पर अनेक मठ और मंदिर हैं, उन्हें भी इसमें शामिल होना चाहिए। कई विषय हैं, जिन पर चर्चा होनी है। बगैर चर्चा के बिल को गलत बताना ये उचित नहीं है। - महेंद्र भट्ट, भाजपा विधायक बदरीनाथ

सहकारी विकास परियोजना में मत्स्य पालन को 30 करोड़ रुपये जारी

राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के तहत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 164.49 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसमें मत्स्य पालन विभाग को पहली किस्त के रूप में 30 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। इस पैसे से क्लस्टर आधारित एक हजार ट्राउट रेसवेज का निर्माण, 30 हेक्टेयर पर मेजर कार्प फार्मिंग, सौ एंग्लिंग बीटों को विकसित किया जाएगा। 

विधानसभा सत्र के चौथे दिन विधायक धन सिंह नेगी के प्रश्न के जवाब में सरकार ने सदन को ये जानकारी दी। राष्ट्रीय सहकारिता विकास निगमन (एनसीडीसी) से स्वीकृत 3300 करोड़ की राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 164.49 करोड़ रुपये की कार्य योजना स्वीकृत है। जिसमें प्रदेश में मत्स्य उत्पादन बढ़ाने के लिए एक हजार ट्राउट रेसवेज का निर्माण किया जाएगा।

वहीं, 100 एंग्लिंग बीट, 30 हेक्टेयर पर पंगेशियस मत्स्य पालन, 30 हेक्टेयर पर मेजर कार्प फार्मिंग, 25 हेक्टेयर पर प्रदूषण मुक्त तालाब, 40 हेक्टेयर पर समन्वित मत्स्य पालन, एक बतख हैचरी, फिश मार्केट, चार रिटेल आउटलेट और 54 वन स्टॉप एक्वा शॉप एवं इंफ्रॉरमेशन सर्विस की स्थापना की जाएगी। कार्य योजना के सापेक्ष सहकारिता विभाग ने मत्स्य पालन विभाग को 30 करोड़ की पहली किस्त जारी कर दी गई है।

बिना चर्चा सदन में ये बिल पास

उत्तराखंड पंचायतीराज (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2019
कारखाना (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2019
संविदा श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2019
उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी (विकास एवं विनियमन )(संशोधन) विधेयक, 2019 
उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950) (संशोधन) विधेयक 2019
सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय विधेयक, 2019

शोरशराबे के बीच बिल सदन में हुए पेश

दंड प्रक्रिया संहिता (उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2019
उत्तराखंड चार धाम श्राइन प्रबंधन विधेयक, 2019

श्राइन बोर्ड के विरोध में तीर्थ पुरोहित का विधानसभा कूच

श्राइन बोर्ड के गठन का विरोध जारी रखते हुए देवभूमि तीर्थ पुरोहित महापंचायत आज फिर से विधानसभा कूच के लिए निकली। इस दौरान सरकार के खिलाफ नारेबाजी की गई। जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया। पुलिस ने उन्हें रोका तो जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। पुलिस ने लाठियां फटकार कर प्रदर्शनकारियों को पीछे धकेला, जिसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं धरने पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। 

महापंचायत के महामंत्री हरीश डिमरी के मुताबिक सरकार श्राइन बोर्ड के गठन को लेकर तीर्थ पुरोहितों को विश्वास में लेने की कोई कोशिश नहीं कर रही हैं। श्राइन बोर्ड के विरोध में ही तीर्थ पुरोहित एक बार पहले भी विधानसभा कूच कर चुके हैं। सीएम आवास पर भी प्रदर्शन किया जा चुका है।
 
इसके साथ ही गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर राजधानी गैरसैंण निर्माण समिति के सदस्यों ने विधानसभा कूच किया। वहीं सेलाकुई में शीशम बाड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट हटाने की मांग को लेकर स्थानीय लोगों ने विधानसभा कूच किया। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार स्थानीय लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है। लोगों के प्रदर्शन के बावजूद अब तक प्लांट पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। प्लांट खोलकर सरकार लोगों को धीमा जहर दे रही है।

सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय विधेयक सदन में पारित 

प्रदेश में नए सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय की स्थापना का विधेयक सोमवार को विधानसभा में पारित हो गया। विधेयक के मुताबिक पंडित बद्री दत्त पांडे पीजी कालेज बागेश्वर, लक्ष्मण सिंह महार पीजी कालेज पिथौरागढ़ और सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा विश्वविद्यालय के तीन परिसर होंगे। विश्वविद्यालय का मुख्यालय सोबन सिंह जीना परिसर अल्मोड़ा में होगा। 

सहकारी विकास परियोजना में मत्स्य पालन को 30 करोड़ रुपये जारी

राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना के तहत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए 164.49 करोड़ का प्रावधान किया गया है। जिसमें मत्स्य पालन विभाग को पहली किस्त के रूप में 30 करोड़ की धनराशि जारी की गई है। इस पैसे से क्लस्टर आधारित एक हजार ट्राउट रेसवेज का निर्माण, 30 हेक्टेयर पर मेजर कार्प फार्मिंग, सौ एंग्लिंग बीटों को विकसित किया जाएगा। 

2022 तक सभी बेघरों और कच्चे मकानों में रहे वाले परिवारों को पक्का आवास

विधानसभा सत्र में कांग्रेस विधायक ममता राकेश की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब में सरकार ने सदन को यह जानकारी दी। सरकार ने अवगत कराया कि केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत 2022 तक सभी बेघर परिवारों व कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों को बुनियादी सुविधा युक्त पक्का आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। अब तक प्रदेश में 12230 परिवारों को आवास की सुविधा प्रदान की गई है।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2011 में सामाजिक आर्थिक जातीय गणना के सर्वे के आधार पर लाभार्थियों का चयन किया है, लेकिन प्रदेश में 94283 परिवार ऐसे हैं। जो सर्वे से छूट गए थे। जिससे आवास योजना से वंचित है। ऐसे परिवारों का योजना में शामिल करने के लिए जियो टैगिंग कर केंद्र को रिपोर्ट भेजी गई है। केंद्र की स्वीकृति मिलने पर इन परिवारों को योजना का लाभ मिल सकता है। 

वित्तीय वर्ष             स्वीकृत बजट (लाख में)
2017-18            2952.441
2018-19            10664.78
 
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कुंजवाल ने उठाई बात, तो दिवंगत तीन पूर्व विधायकों की आई याद

विधानसभा सत्र के पहले दिन तीन दिवंगत पूर्व विधायकों को श्रद्धांजलि देना भूल गई प्रदेश सरकार को कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल ने याद दिलाया। उन्होंने व्यवस्था का प्रश्न उठा कर चिंता जाहिर की कि सदन के पहले दिन ही शोक प्रस्ताव आ जाने चाहिए थे।

कुंजवाल के इस प्रश्न पर सहमत सरकार ने सदन में शोक प्रस्ताव प्रस्तुत किए। जिसमें धनोल्टी से पूर्व विधायक कौल दास, द्वाराहाट के पूर्व विधायक बीडी शर्मा और मसूरी के पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा को श्रद्धांजलि दी गई। 

विपक्ष करता रहा वार, काम निपटाती रही सरकार

विधानसभा में सोमवार को भी वही हुआ जो अब तक हुए तमाम सत्रों के दौरान सदन की कार्यवाही के दौरान होता आ रहा है। विपक्ष के शोर शराबे के बीच सरकार ने बिना चर्चा के अनुपूरक बजट समेत कुल छह विधेयक पारित करा दिए। चारधाम श्राइन प्रबंधन विधेयक के विरोध में विपक्ष सरकार पर वार पर वार करता रहा और सरकार हंगामे के बीच अपना कामकाज निपटाती रही।

ये बात जरूर है कि प्रचंड बहुमत वाली सरकार का विपक्ष पर प्रचंड पलटवार नदारद रहा। विपक्ष के हमलों के बीच संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक अकेले ही जूझते नजर आए। कुछ मौकों पर भाजपा विधायक देशराज कर्णवाल और बदरीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट का उन्हें जरूर समर्थन मिला। लेकिन विपक्षी विधायकों के सीधे निशाने पर आने के बाद दोनों विधायक भी उबाल खाने के बाद बैठ गए।
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