उत्तराखंड श्राइन प्रबंधन विधेयक 2019 को लेकर सोमवार को विपक्ष ने विधानसभा में खूब हंगामा काटा। हंगामे के चलते प्रश्नकाल नहीं चला और विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को सात बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने वैल में आकर जोरदार नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया। स्पीकर के अनुरोध के बावजूद विपक्षी सदस्य अपने स्थान पर नहीं बैठे और वैल में ही धरने पर बैठ गए।
वहीं विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच प्रदेश सरकार ने बगैर चर्चा के उत्तराखंड भूतपूर्व मुख्यमंत्री सुविधा (आवासीय एवं सुविधाएं) विधेयक, 2019 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। ये विधेयक लाकर सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ी राहत दी है। उन पर सरकारी दरों से 25 प्रतिशत अधिक आवास किराया दरें लागू होंगी।
उनका आरोप था कि सरकार गुपचुप ढंग से श्राइन प्रबंधन बिल सदन में ले आई और विपक्ष को विश्वास में नहीं लिया गया। विपक्ष अड़ गया कि जब तक सरकार विधेयक को वापस नहीं लेगी या उसे प्रवर समिति की नहीं भेजेगी, उसका विरोध जारी रहेगा। शोर शराबे के बीच सरकार ने श्राइन प्रबंधन विधेयक समेत दो बिल पेश किए और भोजनावकाश के बाद ध्वनिमत से 2533.90 करोड़ रुपये की अनुपूरक अनुदान मांगें समेत कुल छह विधेयक पारित कर दिए।
इससे पूर्व सोमवार को जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने खेद जताया कि विपक्ष को विश्वास में लिए बिना कार्यसूची में चारधाम श्राइन प्रबंधन विधेयक को पेश कर दिया गया। कार्यमंत्रणा समिति की बैठक में भी इसके बारे में चर्चा नहीं हुई। उन्हें व कांग्रेस सदस्यों को बिल की प्रति तक उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने बिल वापस लेने की मांग की।
इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार चर्चा करने को तैयार है, लेकिन नेता प्रतिपक्ष किस नियम के तहत ये मामला उठा रही हैं? उनके इतना कहते ही कांग्रेस विधायक मनोज रावत वैल में आ गए। उनके पीछे विधायक गोविंद सिंह कुंजवाल, करन माहरा, हरीश धाम, राजकुमार, फुरकान अहमद, ममता राकेश व आदेश गुप्ता भी वैल पहुंच गए। बाद में विधायक प्रीतम सिंह भी विरोध में शामिल हो गए।
नारायण-नारायण का जाप
‘धर्म विरोधी सरकार नहीं चलेगी’, ‘धर्म का जो अपमान करेगा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा’ नारे लगा रहे थे। उन्होंने नारायण-नारायण का जाप करना भी शुरू कर दिया। उन्होंने जय बदरी विशाल और जय केदारनाथ के जयकारे भी लगाए। बार-बार अपील पर जब कांग्रेस विधायक नहीं मानें तो स्पीकर ने सदन की कार्यवाही पहले 11.15 बजे तक स्थगित कर दी। उसके बाद कार्यवाही बाधित होने पर 11.30, 11.40, 12.20, 12.30 इस दौरान हंगामे के बीच सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक व चारधाम श्राइन प्रबंधन विधेयक पटल पर पेश कर दिया।
इस बीच स्पीकर के चैंबर में सदन चलाने को लेकर नेता प्रतिपक्ष और संसदीय कार्यमंत्री की मंत्रणा हुई, लेकिन इसका कोई लाभ नहीं हुआ। विपक्ष का विरोध जारी रहा। स्पीकर ने नेता प्रतिपक्ष को कार्यस्थगन की सूचना पर बात कहने को कहा तो उन्होंने यह कहकर इंकार कर दिया कि आज केवल श्राइन बोर्ड का मामला उठाएंगे। माहौल शांत न होने पर स्पीकर ने 1.20 बजे सदन की कार्यवाही तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
भोजनावकाश के बाद जब सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो विपक्षी सदस्य फिर वैल में आ गए। सरकार ने शोरगुल के बीच छह महत्वपूर्ण विधेयक बगैर चर्चा के ध्वनिमत से पारित करा दिए। इतना ही नहीं हल्ले गुल्ले के बीच अनुपूरक अनुदान मांगें भी ध्वनिमत से पारित करा दी गई। इसके बाद 3.44 बजे स्पीकर ने सदन की कार्यवाही को मंगलवार सुबह 11 बजे तक स्थगित कर दिया।
इनका क्या कहना है...
आपने कैसे जान लिया कि सरकार बिना चर्चा के बिल पास कराना चाहती है। केवल इस कारण से विरोध करेंगे कि आपके नेता ने कहा कि हाउस नहीं चलने दिया जाए। ये प्रदेश की जनता का अपमान है व उनके पैसों का दुरुपयोग है। विपक्ष के मित्र चर्चा के लिए आएं। सरकार चर्चा का हर जवाब देने को तैयार है। जो बिल सदन पटल पर आते हैं, वे कार्यमंत्रणा की बैठक में कभी नहीं आते। विपक्ष बिना नियम के अपनी बात कह रहा है, जो उचित नहीं है। आज की तारीख में जितने लोग हैं, उतने नेता प्रतिपक्ष हैं।
- मदन कौशिक, संसदीय कार्यमंत्री
सरकार बदनीयती से चारधाम श्राइन प्रबंधन बिल लाई है। उसने हमें विश्वास में नहीं लिया। वह हमें सुनने को तैयार ही नहीं है। विपक्ष को बिल तक उपलब्ध नहीं कराए गए। गुपचुप ढंग से बिल लाया जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों का अपमान किया जा रहा है। इसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। जब तक सरकार बिल वापस नहीं लेगी, तब तक हमारा विरोध जारी रहेगा। -
डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
सरकार के सिर पर अहंकार बैठ गया है। चारधाम से जुड़े लोग सड़कों पर हैं। सुबह से विपक्षी विधायक सदन में विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद सरकार ने बिल सदन में पुर:स्थापित किया। सरकार की मंशा पर शक है। उसने नासमझी वाला निर्णय लिया है। नादान और अज्ञानी लोगों के हाथों में सरकार है। जिस तरह नोटबंदी और जीएसटी से देश में आपदा और विप्लव आया है, ठीक उसी तरह आपदा व विप्लव श्राइन बोर्ड विधेयक पारित होने के बाद धार्मिक और आर्थिक क्षेत्र में आएगा।
- मनोज रावत, कांग्रेस विधायक, केदारनाथ
ये दुख की बात है कि विधेयक के सदन पटल पर आने से पहले ही विरोध शुरू कर दिया गया। यह अच्छी परंपरा नहीं है। विधेयक पर चर्चा होनी चाहिए। बहुत सारे विषय हैं। कई मंदिर इसके दायरे में लाए गए हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार और अन्य स्थानों पर अनेक मठ और मंदिर हैं, उन्हें भी इसमें शामिल होना चाहिए। कई विषय हैं, जिन पर चर्चा होनी है। बगैर चर्चा के बिल को गलत बताना ये उचित नहीं है।
- महेंद्र भट्ट, भाजपा विधायक बदरीनाथ