ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण में चले विधानसभा सत्र में शनिवार को विपक्ष के विरोध ने सरकार का काम आसान किया। विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार ने आसानी से अनुदान मांगें व बजट पारित कर लिया।
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छह दिन चले सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच जनहित के मुद्दों पर कभी तल्खी तो कभी नरमी का माहौल भी रहा। कम संख्या बल के बाद भी विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, गन्ना मूल्य और भ्रष्टाचार के मुद्दों को उठाया।
ग्रीष्मकालीन राजधानी बनने के बाद गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा में पहला बजट सत्र शनिवार को संपन्न हो गया। विपक्ष ने मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश की। सत्र के पहले राज्यपाल के अभिभाषण शुरू होते ही विपक्ष सदन से चला गया। लेकिन दूसरे दिन से विपक्ष ने सरकार पर सवालों के तीर छोड़े।
सदन के बाहर और अंदर विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी, गन्ना मूल्य बढ़ाने, को मुद्दों को उठाया। सदन में गन्ना मूल्य न बढ़ाने पर कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन रो पड़े । जबकि सत्ता पक्ष ने इसे घड़ियाली आंसू करार दिया। छह दिनों तक चले सत्र में पक्ष और विपक्ष के बीच मुद्दों पर कभी तल्खी तो कभी नरमी का माहौल रहा।
सत्र के छठे दिन सरकार को देहरादून पहुंचने की जल्दबाजी थी। तो विपक्ष भी सदन में डटा रहा है। लेकिन कोविड महामारी के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा करने से सरकार ने आसान से अनुदान मांगें व बजट पारित कर दिया। सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने तक नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश, प्रीतम सिंह, गोविंद सिंह कुंजवाल, काजी निजामुद्दीन, और ममता राकेश सदन की कार्यवाही में शामिल रहे।
जनहित के मुद्दों को कांग्रेस ने सदन में मजबूती से उठाया। लेकिन सरकार नहीं चाहती है कि लोगों की समस्याओं को उठाया। देहरादून जाने के लिए सरकार इतनी जल्दबाजी में थी कि विपक्ष की नहीं सुनीं गई।
-प्रीतम सिंह, विधायक एवं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष