सितंबर में मात्र तीन दिन का सत्र आयोजित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि सत्र तीन दिन से अधिक का होना चाहिए। हालांकि, अध्यक्ष ने इसे अपनी व्यक्तिगत राय बताया है।
प्रदेश सरकार अनलॉक-3 के दौरान विधानसभा सत्र का आयोजन कर रही है। यह सत्र मात्र तीन दिन का है। सोमवार को विधानसभा में मीडिया से मुखातिब विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है कि वह कितने दिन का सत्र बुलाती है। सरकार के पास अगर हाउस के लिए तीन दिन का ही बिजनेस है तो इसमें मीनमेख नहीं निकाली जा सकती है।
इतना होने पर भी यह महसूस किया जा रहा है कि सत्र की अवधि अधिक होनी चाहिए। खुद विधानसभा अध्यक्ष ने यह स्वीकार भी किया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को सत्र का समय बढ़ाना चाहिए। विपक्ष के विधायकों के तमाम सवाल हैं जिनका जवाब सदन में सरकार की ओर से दिया जाता है। अधिकतम सवालों का जवाब आए इसके लिए समय की अवधि अधिक होनी चाहिए।
देहरादून में ही आयोजित विधानसभा अध्यक्षों के कॉन्क्लेव में भी यह मुद्दा उठा था। अधिकतर राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों का कहना था कि साल भर में कम से कम साठ दिन का सत्र होना चाहिए। प्रदेश में सत्र मात्र कुछ ही दिनों में सिमट कर रह जाता है।
रिवर्स पलायन पर सीएम के रुख से मिलेगा फायदा
गैरसैंण में जमीन खरीदने और इसके बाद सीएम की ओर से रिवर्स पलायन की बात करने को भी विधानसभा अध्यक्ष ने सराहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जन प्रतिनिधियों को इस मामले में पहल करनी चाहिए। विधायक अपने क्षेत्र में रहेंगे तो क्षेत्र के विकास को बेहतर तरीके से परख पाएंगे।
सदन कितने दिन चलेगा यहा कार्यमंत्रणा समिति पर निर्भर करता है। हम इसको आखिरकार बढ़वाएंगे। मात्र तीन दिन में क्या होगा। विपक्ष के मुद्दों को भी तो जगह मिलनी चाहिए।
- इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष