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उत्तराखंड विधानसभा सत्र: केवल तीन दिन का होना है सत्र, लेकिन सवाल आए बेशुमार

Tue, 18 Aug 2020 01:19 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • अभी तक लग चुके हैं 910 सवाल, सिलसिला नहीं थमा तो इस बार बनेगा रिकार्ड 
  • औसतन एक हजार सवाल उठाते रहे हैं विधानसभा सदस्य 
  •  पिछले सत्र में पूछे गए थे कुल मिलाकर 724 सवाल 
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- फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड विधानसभा में इस बार सरकार को सत्ता पक्ष सहित विपक्ष के विधायकों के कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है। सवाल पूछने के मामले में विधानसभा सदस्य इस बार रिकॉर्ड बनाने की ओर अग्रसर हैं। सत्र शुरू होने में अभी काफी समय है और विधानसभा को 910 सवाल मिल चुके हैं। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने इसकी पुष्टि की। 

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विधानसभा सत्र इस बार महज तीन दिन का है और 23 सितंबर से शुरू हो रहा है। कोविड काल में विधायकों ने इस बार सत्र में सवालों की झड़ी भी लगा दी है। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के मुताबिक कोरोना को देखते हुए इस बार विधायकों को ऑनलाइन सवाल दाखिल करने की सुविधा दी गई थी। विधायक भी इस सुविधा का भरपूर फायदा उठा रहे हैं। सवालों की संख्या 900 से अधिक हो चुकी है और सवालों को सिलसिला अभी जारी है। 

विधानसभा से मिली जानकारी के मुताबिक सत्रों में सामान्य रूप से 900 से हजार के बीच में सवाल पूछे जाते हैं। कुछ विधायक हैं जो सवाल पूछने से गुरेज भी नहीं करते। मार्च में आयोजित सत्र में ही विधानसभा को 724 सवाल मिले थे। ऐसे में यह भी जाहिर हो रहा है कि इस बार विधानसभा सत्र में सरकार को कई सवालों का सामना करना पड़ सकता है। इसका सीधा असर मंत्रियों पर भी होगा। प्रश्नकाल में ट्रेजरी बैंच को सवालों के जवाब देने होते हैं और पहले भी कई बार मंत्रियों को खासी फजीहत का सामना इस मामले को लेकर करना पड़ा है।

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तीन दिन के सत्र पर उठ रहे सवाल

सितंबर में मात्र तीन दिन का सत्र आयोजित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल का कहना है कि सत्र तीन दिन से अधिक का होना चाहिए। हालांकि, अध्यक्ष ने इसे अपनी व्यक्तिगत राय बताया है।

प्रदेश सरकार अनलॉक-3 के दौरान विधानसभा सत्र का आयोजन कर रही है। यह सत्र मात्र तीन दिन का है। सोमवार को विधानसभा में मीडिया से मुखातिब विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि यह सरकार का अधिकार क्षेत्र है कि वह कितने दिन का सत्र बुलाती है। सरकार के पास अगर हाउस के लिए तीन दिन का ही बिजनेस है तो इसमें मीनमेख नहीं निकाली जा सकती है। 

इतना होने पर भी यह महसूस किया जा रहा है कि सत्र की अवधि अधिक होनी चाहिए। खुद विधानसभा अध्यक्ष ने यह स्वीकार भी किया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार को सत्र का समय बढ़ाना चाहिए। विपक्ष के विधायकों के तमाम सवाल हैं जिनका जवाब सदन में सरकार की ओर से दिया जाता है। अधिकतम सवालों का जवाब आए इसके लिए समय की अवधि अधिक होनी चाहिए। 

देहरादून में ही आयोजित विधानसभा अध्यक्षों के कॉन्क्लेव में भी यह मुद्दा उठा था। अधिकतर राज्यों के विधानसभा अध्यक्षों का कहना था कि साल भर में कम से कम साठ दिन का सत्र होना चाहिए। प्रदेश में सत्र मात्र कुछ ही दिनों में सिमट कर रह जाता है।

रिवर्स पलायन पर सीएम के रुख से मिलेगा फायदा
गैरसैंण में जमीन खरीदने और इसके बाद सीएम की ओर से रिवर्स पलायन की बात करने को भी विधानसभा अध्यक्ष ने सराहा है। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि जन प्रतिनिधियों को इस मामले में पहल करनी चाहिए। विधायक अपने क्षेत्र में रहेंगे तो क्षेत्र के विकास को बेहतर तरीके से परख पाएंगे।

सदन कितने दिन चलेगा यहा कार्यमंत्रणा समिति पर निर्भर करता है। हम इसको आखिरकार बढ़वाएंगे। मात्र तीन दिन में क्या होगा। विपक्ष के मुद्दों को भी तो जगह मिलनी चाहिए।
- इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
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