उत्तराखंड कृषि उत्पाद मंडी (विकास एवं विनियमन) ( संशोधन) विधेयक पारित कर सरकार ने जैविक उत्पादों के विपणन, क्रय विक्रय एवं प्रसंस्करण के लिए निधि के गठन का रास्ता साफ कर दिया है। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा।
चाय बागान, प्रसंस्करण व वैकल्पिक ऊर्जा सेक्टर में 30 साल की लीज पर दी जा सकेगी भूमि, विधेयक पास
प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्रों में चाय बागान, प्रसंस्करण और वैकल्पिक ऊर्जा सेक्टर के लिए भी भूमि 30 साल की लीज पर दी जा सकेगी। साथ ही भूमि खरीद फरोख्त की सीलिंग की सीमा को भी हटाकर उसे 30 एकड़ कर दिया गया है। ये प्रावधान उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (संशोधन) विधेयक में किए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने इस विधेयक को सोमवार को पारित करा दिया। विधेयक में ये प्रावधान औद्योगिक निवेशन और विकास कार्यों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए हैं। इसके अलावा विधेयक में दिव्यांग स्त्रियों को विभिन्न योजनाओं और विकास कार्यक्रमों के तहत कृषि भूमि के आवंटन में पांच प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
नैनीताल हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों का आवास भत्ता व अन्य सुविधाओं पर हुए खर्चे को माफ करने के संबंधी अध्यादेश के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने याची को छूट दी है कि यदि सरकार इस बीच इससे संबंधित कोई एक्ट लाती है तो याचिकाकर्ता उसे न्यायालय में चुनौती देने को स्वतंत्र है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
देहरादून की रूरल लिटिगेशन संस्था ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर राज्य सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्रियों के अवशेष किराए को माफ करने के अध्यादेश को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, नारायण दत्त तिवारी, विजय बहुगुणा और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को घर खाली कर ब्याज समेत बाजार मूल्य से किराया जमा करने को कहा था।
मामले में चली सुनवाई के बाद न्यायालय आदेश पर पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी की मृत्यु हो जाने और भगत सिंह कोश्यारी के महाराष्ट्र का राज्यपाल बन जाने के चलते उन्हें नोटिस की श्रेणी से बाहर रखा गया है। पक्षों को सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया।