अब तक के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी हार के गम में डूबे कांग्रेसी इलेक्शन कैंपेन गुरु प्रशांत किशोर को कोस रहे हैं। पीके पर ही उत्तराखंड में कांग्रेस के चुनाव प्रचार का दारोमदार था।
चुनाव में कांग्रेस की हवा बनाने के लिये टीम पीके ने युवा और महिला वोट बैंक को साधने के लिए कई फंडे आजमाए। उसके इन फंडों को लेकर भाजपा असहज भी दिखी मगर आखिर में जब चुनाव परिणाम आए तो इन फंडों को हवा निकल चुकी थी। कांग्रेस को अशांत कर टीम प्रशांत सीन से गायब है।
ऐतिहासिक पराजय के बाद तय है कि कांग्रेस उन कारणों की पड़ताल करेगी जिन्होंने उसे सत्ता से बेदखल कर दिया। इसमें मुख्यमंत्री का वन मैन आर्मी की तरह काम करना व संगठन और सरकार में तकरार से लेकर प्रचार का पूरा जिम्मा इलेक्शन गुरु प्रशांत किशोर को सौंपना सबसे ज्यादा चर्चा में है।
प्रशांत किशोर ने नारा गढ़ा ‘रावत पूरे पांच साल’
harish rawat
दरअसल, विधानसभा चुनाव से पूर्व कांग्रेस प्रचार को लेकर अलग रणनीति पर काम कर रही थी। इसके लिए सांगठनिक स्तर पर एक्सरसाइज भी शुरू हो चुकी थी। मगर जैसे प्रत्याशियों के नाम तय होने की बारी आई प्रशांत किशोर की एंट्री हो गई। ये एंट्री वाया बीजापुर हुई, जहां मुख्यमंत्री का अस्थायी आवास है।
प्रशांत किशोर ने नारा गढ़ा ‘रावत पूरे पांच साल।’ खुलकर बेशक कोई नहीं बोला मगर दबी जुबान कांग्रेसियों ने सवाल उठाए पूरे पांच साल रावत ही क्यों, कांग्रेस क्यों नहीं? हरीश रावत को पार्टी से बड़ा बना दिया जाना उन्हें फूटी आंख नहीं सुहा रहा था। शुरुआत में किशोर भी कसमसाये मगर आलाकमान के दखल के बाद उन्होंने भी चुप्पी साध ली।
उनकी चुप्पी के साथ ही पार्टी का सांगठनिक नेटवर्क ध्वस्त होता चला गया और टीम किशोर खुलकर मैदान में उतर आई। मोर्चे पर आते ही टीम किशोर ने सोशल मीडिया पर प्रचार के जो फंडे आजमाये उन्होंने सुर्खियां तो खूब बटोरी मगर ये वोटों में नहीं बदल पाई। बेरोजगारी भत्ते को लेकर उसने युवाओं को तात्कालिक तौर पर रिझाने का प्रयास भी किया।
टीम पीके के प्रचार का अंदाज पसंद नहीं आया
संबोधित करते किशोर उपाध्याय
- फोटो : file photo
जैसे-जैसे टीम किशोर का दखल बढ़ता गया, कांग्रेसी कार्यकर्ता घरों में दुबकते चले गए। सिर्फ कार्यकर्ता ही नहीं पार्टी प्रत्याशियों को टीम पीके के प्रचार का अंदाज पसंद नहीं आया। कांग्रेस भवन में पिछले दिनों हुई एक बैठक में कुछ प्रत्याशियों ने इस बात पर खुलकर एतराज जताया कि प्रचार में प्रत्याशी के बजाय हरीश रावत पर फोकस किया गया है।
जाहिर है कि अब कांग्रेसियों का पूरा गुस्सा पार्टी की गुटबाजी, बगावत और भितरघात के साथ प्रशांत किशोर पर फूटेगा। फिलहाल कांग्रेस की इस ऐतिहासिक पराजय में कांग्रेस के किशोर तो हैं मगर प्रशांत किशोर का कुछ पता नहीं है।
बहाने तो ये भी बनेंगे
हार की जवाबदेही से बचने के लिए कांग्रेस के पास बहाने भी कम नहीं होंगे। अपने बचाव में उसके नेताओं ने नोटबंदी को सबसे बड़ी ढाल बनाया है। पूरे चुनाव के दौरान पार्टी प्रत्याशी भाजपा के चुनाव खर्च पर सवाल उठाते रहे। पार्टी अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने तो पीएम पर सीधे आरोप तक लगाया कि उनके इशारे पर लोगों को चंदा देने से रोका गया।