विपक्ष की ओर से केदारनाथ समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई आपदा, महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बढ़ते मामले, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन के अंदर व बाहर सरकार को घेरने की रणनीति है, जबकि सत्ता पक्ष सदन में विपक्ष के हर सवाल का मजबूती के साथ जवाब देगा।
सदन को गरमाएंगे पांच सौ से अधिक सवाल
विधानसभा सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के सवाल सदन को गरमाएंगे। विधानसभा सचिवालय को 500 से अधिक सवाल मिले हैं। इन सवालों पर सदन में चर्चा की जाएगी।
जीवनभर दिवंगत कैलाश गहतोड़ी का ऋणी रहूंगा: मुख्यमंत्री धामी
ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा में तीन दिवसीय सत्र शुरू हो गया। पहले दिन सदन में केदारनाथ विधानसभा से विधायक रही शैलारानी रावत व चंपावत विधानसभा से पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
नेता सदन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, पूर्व विधायक गहतोड़ी का निधन मेरे लिए निजी क्षति है। 2022 के विधानसभा चुनाव से छह माह पहले मुझे से मुख्य सेवक का दायित्व मिला। मेरे ऊपर प्रदेश में दोबारा पार्टी को सत्ता में आने की बड़ी जिम्मेदारी थी। जिस वजह से मैं अपने विधानसभा क्षेत्र खटीमा में नहीं जा पाया और चुनाव हार गया।
कई विधायकों ने मेरे पर भरोसा जताते हुए अपनी सीट से लड़ने के लिए कहा। चुनाव परिणाम घोषित होने के चंद मिनट में गहतोड़ी ने घोषणा की थी कि चंपावत सीट धामी के लिए खाली करेंगे। कहा, गहतोड़ी का जीवन भर ऋणी रहूंगा। चंपावत क्षेत्र में उनके सपने को आगे बढ़ाने के लिए मेरा हर पल समर्पित है।
गहतोड़ी के निधन से चंपावत क्षेत्र के विकास को अपूरणीय क्षति हुई हैै। सीएम ने केदारनाथ सीट से विधायक शैलारानी के निधन पर शोक जताते हुए कहा, वह हमेशा लोगों के संघर्ष में खड़ी रहती थीं। समर्पित होकर जनसेवा करती थी। उनका क्षेत्र के विकास के प्रति समर्पण भाव हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। शैलारानी ने मुझे छोटे भाई के रूप में स्नेह दिया।
विधायक शैलारानी
केदारनाथ सीट से विधायक शैलारानी रावत टिहरी की रहने वाली थीं। 1996 में पहली बार अगस्त्यमुनि से ब्लाक प्रमुख रहीं। 2003 में जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग बनीं। पहली बार 2012 में केदारनाथ विधानसभा लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2022 में इस सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरी बार विधायक चुनीं गई थी।
पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी
चंपावत के पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी 2003 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए। 2009 में भाजपा में शामिल होकर जनसेवा में जुटे, लेकिन 2015 में कैंसर बीमारी से ग्रसित हो गए। इसके बावजूद भी जनसेवा में सक्रिय रहे। 2017 में चंपावत विस से पहली बार चुनाव लड़ा और विजयी रहे। 2022 के चुनाव में दूसरी बार विधायक चुने गए, लेकिन सीएम धामी के खटीमा से चुनाव हारने के कारण गहतोड़ी ने सीट छोड़ दी थी। इसके बाद उन्हें वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया था।