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Uttarakhand: गैरसैंण में विधानसभा का मानसून सत्र, पहले दिन तीन विधेयक पेश, सत्र की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित

Wed, 21 Aug 2024 05:41 PM IST
अलका त्यागी अमर उजाला ब्यूरो, भराड़ीसैंण

सार

Uttarakhand Assembly Monsoon Session 1st Day: भराड़ीसैंण में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। विपक्ष ने सदन के अंदर और बाहर आपदा और कानून व्यवस्था समेत अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरेगी, जबकि प्रदेश सरकार ने विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए रणनीति बनाई है।
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विधानसभा सत्र - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा में तीन दिवसीय सत्र बुधवार से शुरू हो गया। पहले दिन सदन में पक्ष और विपक्ष ने केदारनाथ सीट से विधायक शैलारानी रावत और चंपावत सीट से पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी के निधन पर शोक जताकर श्रद्धांजलि दी।

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संसदीय कार्य मंत्री प्रेेमचंद अग्रवाल ने तीन अध्यादेश सदन पटल पर रखे। बुधवार को बारिश संग भराड़ीसैंण की वादियां घने कोहरे से घिरी रहीं, जिससे ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण ने ठंड का अहसास कराया। सत्र ठीक सुबह 11 बजे शुरू हुआ। विस अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने सदन संचालन के लिए कार्यमंत्रणा समिति की सिफारिशों से सदन काे अवगत कराया।

इसके बाद पक्ष और विपक्ष ने दिवंगत विधायकों को याद कर श्रद्धांजलि देकर उनके संस्मरणों काे साझा किया। शोक प्रस्ताव से सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चली। सदन के अंदर व बाहर विपक्ष शांत रहा। सीएम पुष्कर सिंह धामी, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, संसदीय कार्यमंत्री प्रेमचंद अग्रवाल, मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत, रेखा आर्य, सुबोध उनियाल, सौरभ बहुगुणा, गणेेश जोशी समेत पक्ष व विपक्ष के विधायकों ने शोक जताया।
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उधर, रात को भारी बारिश के कारण कर्णप्रयाग-गैरसैंण मार्ग पर कई जगह भूस्खलन होने से यातायात बाधित रहा, जिससे सत्र के लिए गैरसैंण जा रहे अधिकारी भी फंसे रहे, लेकिन लोक निर्माण विभाग की मशीनरी ने युद्ध स्तर पर काम कर मार्ग से मलबा हटाकर यातायात बहाल किया।

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ये अध्यादेश हुए पेश

- उत्तराखंड लोक तथा निजी संपत्ति क्षति वसूली अध्यादेश-2024
- उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम 1959) संशोधन अध्यादेश-2024
- उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम 1916) संशोधन अध्यादेश-2024

चप्पे-चप्पे पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

गैरसैंण से भराड़ीसैंण के बीच दिवालीखाल से विधानसभा भवन तक चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। बैरिकेडिंग लगाकर बिना पास के किसी भी व्यक्ति को विधानसभा परिसर जाने की अनुमति नहीं है।

विपक्ष की ओर से केदारनाथ समेत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आई आपदा, महिलाओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के बढ़ते मामले, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन के अंदर व बाहर सरकार को घेरने की रणनीति है, जबकि सत्ता पक्ष सदन में विपक्ष के हर सवाल का मजबूती के साथ जवाब देगा।

सदन को गरमाएंगे पांच सौ से अधिक सवाल

विधानसभा सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के सवाल सदन को गरमाएंगे। विधानसभा सचिवालय को 500 से अधिक सवाल मिले हैं। इन सवालों पर सदन में चर्चा की जाएगी।
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जीवनभर दिवंगत कैलाश गहतोड़ी का ऋणी रहूंगा:  मुख्यमंत्री धामी

ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण के भराड़ीसैंण विधानसभा में तीन दिवसीय सत्र शुरू हो गया। पहले दिन सदन में केदारनाथ विधानसभा से विधायक रही शैलारानी रावत व चंपावत विधानसभा से पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।

नेता सदन एवं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, पूर्व विधायक गहतोड़ी का निधन मेरे लिए निजी क्षति है। 2022 के विधानसभा चुनाव से छह माह पहले मुझे से मुख्य सेवक का दायित्व मिला। मेरे ऊपर प्रदेश में दोबारा पार्टी को सत्ता में आने की बड़ी जिम्मेदारी थी। जिस वजह से मैं अपने विधानसभा क्षेत्र खटीमा में नहीं जा पाया और चुनाव हार गया।
कई विधायकों ने मेरे पर भरोसा जताते हुए अपनी सीट से लड़ने के लिए कहा। चुनाव परिणाम घोषित होने के चंद मिनट में गहतोड़ी ने घोषणा की थी कि चंपावत सीट धामी के लिए खाली करेंगे। कहा, गहतोड़ी का जीवन भर ऋणी रहूंगा। चंपावत क्षेत्र में उनके सपने को आगे बढ़ाने के लिए मेरा हर पल समर्पित है।

गहतोड़ी के निधन से चंपावत क्षेत्र के विकास को अपूरणीय क्षति हुई हैै। सीएम ने केदारनाथ सीट से विधायक शैलारानी के निधन पर शोक जताते हुए कहा, वह हमेशा लोगों के संघर्ष में खड़ी रहती थीं। समर्पित होकर जनसेवा करती थी। उनका क्षेत्र के विकास के प्रति समर्पण भाव हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगा। शैलारानी ने मुझे छोटे भाई के रूप में स्नेह दिया।

विधायक शैलारानी

केदारनाथ सीट से विधायक शैलारानी रावत टिहरी की रहने वाली थीं। 1996 में पहली बार अगस्त्यमुनि से ब्लाक प्रमुख रहीं। 2003 में जिला पंचायत अध्यक्ष रुद्रप्रयाग बनीं। पहली बार 2012 में केदारनाथ विधानसभा लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2022 में इस सीट पर भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरी बार विधायक चुनीं गई थी।

पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी

चंपावत के पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी 2003 में जिला पंचायत सदस्य चुने गए। 2009 में भाजपा में शामिल होकर जनसेवा में जुटे, लेकिन 2015 में कैंसर बीमारी से ग्रसित हो गए। इसके बावजूद भी जनसेवा में सक्रिय रहे। 2017 में चंपावत विस से पहली बार चुनाव लड़ा और विजयी रहे। 2022 के चुनाव में दूसरी बार विधायक चुने गए, लेकिन सीएम धामी के खटीमा से चुनाव हारने के कारण गहतोड़ी ने सीट छोड़ दी थी। इसके बाद उन्हें वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया था।
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