उत्तराखंड में भाजपा को मिले प्रचंड बहुमत के पीछे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की रात-दिन की मेहनत है। संघ के कार्य चुनाव के मौके पर भाजपा के काम आए हैं। कांग्रेस सरकार के खिलाफ भाजपा किसी भी मुद्दे पर कभी कोई अभियान दमदारी के साथ नहीं चला पाई। वहीं, संघ ने हर मुद्दे पर सामाजिक अभियान चलाकर समाज के हर तबके को जोड़ा।
इतना नहीं मुसलिम बहुल इलाकों तक में संघ के वैचारिक संगठनों ने पुरजोर तरीके से मतदाता जागरूकता की मुहिम छेड़कर सार्थक संदेश दिया। उत्तराखंड के संवेदनशील मुद्दों-आपदा, पलायन, गंगा और पर्यावरण संरक्षण, ग्राम्य विकास, स्वच्छता, स्वास्थ्य आदि पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने लगातार काम किया है। विपक्षी दल होने के नाते भाजपा तथा कांग्रेस इन पर ढंग से काम नहीं कर पाई।
जब दलितों के मंदिर में घुसने के विरोध का मुद्दा उछला तो संघ ने वहां सर्व समाज सद्भाव अभियान छेड़ दिया। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान सबसे पहले स्वयं सेवक मौके पर पहुंचे और लोगों के लिए खाद्य सामग्री, चिकित्सा का इंतजाम किया। जिन क्षेत्रों से भाजपा के कदम उखड़ रहे थे, वहां संघ ने कुटुम्ब प्रबोधन मुहिम चलाकर लोगों को जोड़ लिया। इसी तरह गांवों और नगरीय मोहल्लों में सहभोज कार्यक्रम चलाकर क्षेत्रीय वातावरण में एकजुटता का माहौल बनाए रखा।
संघ के अपना गांव-अपना देश, ग्राम्य विकास अभियान से भी लोग जुड़े। संघ के इन कार्यक्रमों का फायदा यह हुआ कि भाजपा को बिना मेहनत के ही मीठा फल मिल गया। हालत यह हुई कि संघ के हरैला कार्यक्रम को कांग्रेस सरकार को अपनाना पड़ा।
श्मशान और जलस्रोत सबके लिए सरीखे अभियान से दलित मतदाता प्रभावित हुआ। इसका फायदा भाजपा को मिला। प्रदेश सरकार के पहले गंगा सफाई की मुहिम संघ की जिला इकाइयों ने शुरू की थी, ये सरकारी अभियानों से अधिक कारगर रही है। भाजपा राजनीतिक उठा-पटक में फंस रही, लेकिन संघ ने हर स्थिति की गहन समीक्षा करके रणनीति तैयार की। भाजपा की जीत के संबंध में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रांत कार्यवाह उत्तराखंड लक्ष्मी प्रसाद जायसवाल का कहना है कि यह नीतियों और कार्यकर्ताओं के अथक परिश्रम का परिणाम है। यह राष्ट्रवाद की जीत है।