फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘सिपाही’ की भितरघात से ‘सेनापति’ हारे

Sun, 12 Mar 2017 11:48 AM IST
अमरनाथ/ अमर उजाला, हल्द्वानी
विज्ञापन
अजय भट्ट - फोटो : AmarUjala
विज्ञापन
उत्तराखंड में ज्यादातर विधानसभा सीटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर का असर दिखा, लेकिन रानीखेत विधानसभा सीट पर यह लहर काम न आई। अपनों की नाराजगी की वजह से भी भाजपा सेनापति अजय भट्ट को करारी हार का सामना करना पड़ा। एक समय भाजपा के सिपाही रहे एक युवा नेता ने निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरकर भाजपा प्रत्याशी के वोट बैंक में सेंधमारी कर दी और कांग्रेस के करन माहरा जीत गए।
विज्ञापन


पिछली बार इस हॉट सीट पर अजय भट्ट 14089 मत प्राप्त कर मात्र 78 वोटों से जीते थे, लेकिन इस बार उन्हें 14054 वोट ही मिल पाए। जानकार बताते हैं कि भाजपा कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से लंबे समय तक दूरियां बनाए रखना भाजपा के कद्दावर नेता को महंगा पड़ गया। लोग अपने विधायक से इस कदर नाराज हो गए कि मोदी लहर का कोई असर नहीं हुआ। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट अपना दुर्ग नहीं बचा सके, जो लोगों के बीच चर्चा का विषय है।

भाजपा इस सैनिक बहुल सीट पर चुनाव में न तो ओआरओपी को भुना सकी और न ही सर्जिकल स्ट्राइक को। आपसी खींचतान में यह सीट उलझकर रह गई। यहां तक कि जिस बागी नेता की ताकत को भाजपा प्रत्याशी कम करके आंक रहे थे, उसी (पूर्व भाजयुमो उपाध्यक्ष प्रमोद नैनवाल) ने 5701 वोट अपनी झोली में डालकर अजय भट्ट को तीसरी बार जीतने के सपने को तोड़ दिया। हालांकि, पिछली बार के बसपा प्रत्याशी के परिवार का समर्थन भी अजय भट्ट को हासिल था।
विज्ञापन


यदि वोट बैंक तीन खानों में नहीं बंटता तो शायद अजट भट्ट जीत जाते। बताया जाता है कि निर्दलीय उम्मीदवार प्रमोद नैनवाल को चुनाव मैदान में उतारने के पीछे बीजेपी के एक धड़े का हाथ था। आपसी खींचतान की राजनीति और बीजेपी के स्टार प्रचारकों का भट्ट से काफी समय तक दूरियां बनाए रखना भी भाजपा के दिग्गज नेता की हार का कारण बना, जबकि भट्ट 2002 और 2012 के चुनाव में इसी सीट से जीते थे।

कांग्रेस प्रत्याशी और निवर्तमान सीएम हरीश रावत के नजदीकी करन माहरा पर जनता ने दूसरी बार भरोसा जताया है। इससे पहले वह 2007 में जीते थे। हरीश रावत के गृह क्षेत्र होने, उनके सीएम बनने की उम्मीद और इस विधानसभा क्षेत्र के ठाकुर बहुल होने के चलते करन माहरा को पिछली बार से अधिक लोगों ने मत देकर जीत दिलाई है। हालांकि, वह विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़े, पर बसपा के प्रत्याशी के कमजोर होने का लाभ भी उन्हें मिला है। खास बात यह कि बसपा इस बार मात्र 1169 वोटों पर सिमट कर चौथे स्थान पर पहुंच गई, जबकि पिछले चुनाव में 9346 वोट पाकर बसपा तीसरे नंबर पर थी। उक्रांद को मात्र 414 वोट मिले हैं, जबकि उससे अधिक 637 लोगों ने नोटा का विकल्प चुना है।
विज्ञापन


2017 में किसे कितने वोट मिले
करन माहरा- कांग्रेस -19035
अजय भट्ट - भाजपा-14054
प्रमोद नैनवाल- निर्दलीय -5701
कृपाल राम आर्य - बसपा-1169
प्रताप सिंह शाही- उक्रांद- 414
नोटा-637

2012 में किसे कितने वोट मिले
अजय भट्ट-भाजपा- 14089
करन माहरा-कांग्रेस- 14011
पूरन सिंह डंगवाल- बसपा-9346
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें