सरकार के सामने ग्रामीण सड़कों की मरम्मत सबसे बड़ी चुनौती है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना में इन सड़कों का निर्माण तो हो गया है। लेकिन जिन सड़कों को बने पांच से सात साल हो चुके हैं, वे मरम्मत के अभाव में बद से बदतर हो गई हैं। योजना में उनकी मरम्मत के बजट का प्रावधान नहीं है।
देखरेख के लिए इन सड़कों को बाद में लोनिवि के हवाले कर दिया जाता है। लेकिन ये बात उच्च शिक्षा राज्यमंत्री की बैठक में खुलकर सामने आ चुकी है कि लोनिवि इन बदहाल सड़कों को लेने के लिए तैयार नहीं है। इसकी एक मात्र वजह बजट की कमी है। इन्हीं बदहाल गांवों की सड़कों को सुधारने का दबाव विधायकों पर है।
विभाग ने इस साल करीब एक हजार किमी सड़कों का नवीनीकरण किया है। बजट की उपलब्धता के हिसाब से सालाना करीब 1500 से 2000 किमी सड़कों के नवीनीकरण का लक्ष्य तय होता है। विभाग के पास सड़कों की मरम्मत के जो भी प्रस्ताव हैं, उन पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य हो रहा है। अनुपूरक बजट में 222 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस धनराशि के प्राप्त होने से सड़कों पर और तेजी से काम होगा।
- हरिओम शर्मा, प्रमुख सचिव, लोनिवि