इसके बीच में एक छेद है, जहां शुद्ध कपूर डालकर जलाया जाता है। इससे होने वाला धुआं पूरी तरह एंटी बैक्टीरियल होता है। खास बात ये है कि जब तक सांस में इस धुएं को बहुत अधिक न लिया जाए यह व्यक्ति को नुकसान नहीं करता।
आयुर्वेद विवि के कुलपति प्रो. सुनील जोशी ने बताया कि विशेषज्ञों ने लंबे अनुभव के बाद इसे तैयार किया है। आंतरिक प्रयोगशाला में इसके इस्तेमाल के प्रभावों का अध्ययन किया गया, जो बेहद सकारात्मक रहा है।
आयुर्वेद विवि ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ओजस क्वाथ तैयार किया है। कुलपति प्रो. सुनील जोशी के अनुसार इसमें कई तरह की जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया है। विवि ने सरकार को प्रस्ताव दिया है कि जब भी स्कूल खुलें बच्चों को सुबह और शाम ओजस क्वाथ पिलाया जाए। विवि इसके लिए मुफ्त क्वाथ उपलब्ध कराने को भी तैयार है।