पुरोला को मुख्यमंत्रियों ने केवल चुनावों में याद किया है। वर्ष 2011 के बाद से चुनावी सभाओं को छोड़कर कोई भी मुख्यमंत्री पुरोला नहीं आया है। मंगलवार को भाजपा सरकार के पांच साल के शासन के बाद अब चुनाव में ही सीएम वोट मांगने यहां पहुंचे।
राज्यगठन के बाद पुरोला में स्व. नित्यानंद स्वामी, स्व. नारायण दत्त तिवारी, भगत सिंह कोश्यारी, मेजर जनरल (सेनि) भुवनचंद्र खंडूड़ी व डा. रमेश पोखरियाल निशंक आए। वर्ष 2011 में तत्कालीन सीएम डा. निशंक ने यमुनोत्री को जिला बनाने की घोषणा की थी, लेकिन घोषणा के अनुसार अब तक जिले का गठन नहीं हो पाया है। जिसके चलते लोगों में सीएम के खिलाफ भारी आक्रोश एक जनांदोलन के रूप में भी उभरकर सामने आया था।
यहां के लोगों ने पुरोला को जिला बनाने की मांग को लेकर उग्र आंदोलन भी चलाया, जिसके बाद से पुरोला ब्लाॅक में कोई भी सीएम किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। लेकिन वर्ष 2017 में एक चुनावी सभा में तत्कालीन सीएम हरीश रावत और अब वर्ष 2022 के चुनाव में सीएम पुष्कर सिंह धामी भी वोट मांगने के लिए यहां जरूर पहुंचे।