कांग्रेस ऐसा कदम नहीं उठाना चाहती, जिससे पार्टी का कोई धड़ा असहज हो। वैसे इस दौड़ में हरीश-प्रीतम के अलावा भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए पूर्व कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य और प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल भी बताए जाते हैं। लेकिन यह तो चुनाव बाद ही तय हो पाएगा कि उस वक्त क्या समीकरण बैठते हैं। फिलहाल पार्टी का रुख इस मामले में स्पष्ट है कि चुनाव सामूहिक नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा।
पंजाब में कांग्रेस सत्ता में है, जबकि उत्तराखंड में विपक्ष में है। पंजाब में पार्टी संविधान के अनुरूप ही निर्णय लिया गया है। जबकि उत्तराखंड में भी पार्टी संविधान के अनुरूप ही निर्णय लिया जाएगा। चुनाव सामूहिक नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। सत्ता में आने के बाद विधायक दल अपना नेता चुनेगा। इसके बाद पार्टी हाईकमान की ओर से नाम की घोषणा की जाएगी।
- प्रो. गौरव वल्लभ, राष्ट्रीय प्रवक्ता, एआईसीसी
हरीश रावत चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हैं। जाहिर तौर पर वह पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। सीएम को लेकर हाईकमान ने अंतिम निर्णय लेना है। यह पार्टी की रीत है और यही पार्टी का संविधान है।
-देवेंद्र यादव, प्रदेश प्रभारी