नामांकन वापसी के बाद भाजपा एक फरवरी से प्रदेश के सभी 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव महाभियान शुरू करेगी। इसके लिए पार्टी ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। महाभियान के दौरान विधानसभाओं में वर्चुअल रैली के साथ ही पार्टी नेता घर-घर जाकर लोगों से संपर्क करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल रैली कराने की तैयारी चल रही है। इसके अलावा भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं।
भाजपा प्रदेश चुनाव प्रभारी एवं केंद्रीय मंत्री प्रहलाद जोशी ने बताया कि 31 जनवरी को नामांकन वापसी के बाद एक फरवरी से भाजपा सभी विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव महाभियान शुरू करेगी। चुनाव अभियान के शुभारंभ हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, हिमाचल के मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर, प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक समेत सभी पूर्व मुख्यमंत्री भी मौजूद रहेंगे। चुनाव आयोग ने एक फरवरी से पांच सौ की संख्या में चुनावी सभाएं करने की अनुमति दी है। कोविड नियमों का पालन कर भाजपा 70 विधानसभा सीटों पर चुनावी सभाएं करेंगे।
हर विधानसभा क्षेत्र में 10 जगह पर वर्चुअल माध्यम से प्रचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वर्चुअल चुनावी रैली को लेकर भी पार्टी तैयारी कर रही है। इसके अलावा भाजपा राष्ट्रीय जगत प्रकाश नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह समेत पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं के चुनाव प्रचार कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं।
दो फरवरी को वर्चुअल रैली करेंगी प्रियंका
उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 में स्टार प्रचारकों की कमी से जूझ रही कांग्रेस का सूखा दो फरवरी को पार्टी की महासचिव प्रियंका गांधी तोड़ने जा रही हैं। प्रियंका वर्चुअल रैली को संबोधित करेंगी। पार्टी नेताओं का कहना है कि एक फरवरी के बाद यदि निर्वाचन आयोग की ओर से खुली रैलियों की छूट मिली तो प्रदेशभर में रैलियां आयोजित की जाएंगी।
बीजेपी के बड़े नेता जहां उत्तराखंड में आकर डोर टू डोर कैंपेन कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस इसमें पिछड़ती नजर आ रही है। अब दो फरवरी को कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव और स्टार प्रचारक प्रियंका गांधी उत्तराखंड की जनता को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करेंगी। इससे पहले नौ जनवरी को श्रीनगर और अल्मोड़ा में प्रियंका की रैली प्रस्तावित थी, जो स्थगित हो गई थी।
प्रदेश के विधानसभा चुनाव प्रचार में केवल 13 दिन का समय बचा है। 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार पर रोक लग जाएगी। इन 13 दिनों में प्रत्याशियों के लिए हर घर तक पहुंच बनाने में तमाम चुनौतियां पेश आने वाली हैं।
वर्तमान में सबसे बड़ी चुनौती तो कोविड संक्रमण की है, जिसके चलते चुनाव आयोग ने तमाम बंदिशें लगाई हुई हैं। इन बंदिशों के बीच जैसे-तैसे प्रत्याशी अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं। दूसरी चुनौती फरवरी के मौसम की है। मौसम विभाग ने फरवरी के पहले सप्ताह में मौसम खराब होने का अनुमान जताया है। मैदानी क्षेत्रों के मुकाबले बारिश-बर्फबारी होने पर पर्वतीय क्षेत्रों में चुनाव प्रचार खासा मुश्किल काम होगा। ऐसे में वर्चुअल मंच एक बड़ा माध्यम हो सकता है लेकिन उसमें भी दुर्गम पर्वतीय इलाकों में कनेक्टिविटी की चुनौती है।
वर्चुअल प्रचार की बात करें तो बड़े दलों ने तो स्टूडियो बनाकर अपनी वर्चुअल चुनावी रैलियां तेज कर दी हैं लेकिन छोटे दल और निर्दलीय प्रत्याशियों के लिए तो जमीनी स्तर पर ही प्रचार सबसे बड़ा माध्यम है। उनके पास न तो इतने संसाधन हैं और न ही इतने फॉलोअर्स व टीम है जो कि आम जनता तक उनकी पहुंच वर्चुअल माध्यम से मजबूत कर सके।
एक जनवरी से मिलेगी कुछ राहत
फिलहाल चुनाव आयोग ने सभी तरह की रैलियों, रोड शो, बड़ी सभाओं पर रोक लगाई हुई है। एक जनवरी से प्रत्याशियों को इसमें कुछ राहत मिलेगी। दरअसल, चुनाव आयोग ने एक जनवरी से प्रत्याशियों को रैली करने की छूट दी है, जिसमें अधिकतम 500 लोग शामिल हो सकते हैं। यह रैलियां या जनसभाएं उस जिले के जिलाधिकारी की ओर से चिह्नित किए गए स्थानों पर ही होंगी। इसके लिए सभी जिलों के जिलाधिकारियों ने विधानसभावार रैली स्थल चिह्नित किए हैं।