लीडरों के लिए आज की रात कयामत की रात है। लेकिन वोटरों के लिए आज की सुबह चिंतन की सुबह है। पेश हैं अमर उजाला के उत्तराखंड संपादक संजय अभिज्ञान के सवाल और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जवाब:
भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण में और फिर इस नवोदित राज्य को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें कोई दोराय नहीं कि श्रद्धेय अटल जी ने उत्तराखण्ड राज्य का निर्माण किया और मोदी जी के मार्गदर्शन, दिशानिर्देशन और अपार सहयोग से हमारा राज्य निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर है। भाजपा के शासनकाल में उत्तराखण्ड में अनगिनत विकास और जनकल्याण के कार्य हुए हैं, उनमें से ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेललाइन, चारधाम ऑल वेदर रोड, केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण तीन प्रमुख उपलब्धियां हैं। ऐसे में जनता भाजपा को क्यों न वोट दे?
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2) आरोप है कि उत्तराखंड में भाजपा और कांग्रेस का चरित्र एक जैसा हो चुका है। यह कितना सच है?
भाजपा और कांग्रेस में उतना ही फर्क है जितना दिन और रात में है। हमारी पार्टी राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलती है जबकि कांग्रेस के लिए व्यक्ति प्रथम है। देशहित से कांग्रेस का कोई लेना देना नहीं। कांग्रेस पार्टी भारतीय सेना और देश की संवैधानिक संस्थाओं को संदेह की नजरों से देखने वाली पार्टी है। भ्रष्टाचार और कांग्रेस पार्टी का चोली दामन का साथ है।
(3) अगर एक जैसा चरित्र नहीं है तो भाजपा सरकार को इतने सारे पूर्व कांग्रेसियों को सरकार और पार्टी में महत्वपूर्ण पद क्यों देने पड़े?
देखिए! प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारे देश की दुनियाभर में साख बढ़ी है, मान सम्मान बढ़ा है। आज का भारत विकसित देशों के सामने सहम कर नहीं रहता बल्कि बराबरी की बात करता है, आपसी सहयोग से आगे बढ़ने की बात करता है। प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में देश एकजुट होकर विश्व में आध्यात्मिक और आर्थिक प्रगति का परचम लहराने को आतुर है। मोदी जी की खासियत, काबीलियत और उपलब्धियों से प्रभावित होकर अन्य राजनैतिक दलों के तमाम लोग भाजपा का दामन थाम रहे हैं। यदि देशहित में कोई व्यक्ति भाजपा की रीति नीति अपनाने को सहृदय तैयार है तो उसे कोई जिम्मेदारी सौंपने में परेशानी क्या है?
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(4) लोग कह रहे हैं कि उत्तराखंड ने हरियाणा से उसकी `आयाराम-गयाराम` वाली दलबदलू राजनीति की पहचान छीन कर वह सेहरा अपने सिर बांध लिया है। आप सहमत हैं?
ऐसा कोई भी राज्य बता दीजिए जिसमें राजनैतिक दलों के लोग एक से दूसरे दल में नहीं चले जाते। मैंने कहा न कि देश और प्रदेश के हित में यदि कहीं दलबदल भी होता है तो वह जायज है। हां, निजी स्वार्थ के लिए दल बदल की परम्परा पर निश्चित रूप से अंकुश लगना चाहिए।
(5) आप युवा हैं पर तजुर्बा कम है। कैसे संतुलन साधेंगे?
मुख्यमंत्री जैसी अहम जिम्मेदारी को संभालने के लिए अनुभव के साथ ही विजन भी जरूरी है। सत्ता पक्ष ही नहीं विपक्ष के लोगों को भी साथ लेकर चलना पड़ता है। मैंने अपने छह माह के कार्यकाल में सभी को साथ लेकर विकास करने का पूरा प्रयास किया है। इस दौरान मुझे सभी का भरपूर स्नेह और आशीर्वाद मिला।
(6) भाजपा को इस चुनाव में पहले से बहुत ज्यादा पसीना बहाना पड़ रहा है। यह `आप पार्टी` का असर है या पांच साल में सरकार बदल देने वाले उत्तराखंडी वोटर की फितरत का?
उत्तराखण्ड में भाजपा विकास के मुद्दे के साथ चुनाव लड़ रही है। यही वजह है कि हमने, `किया है, करती है, करेगी सिर्फ भाजपा` का नारा दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि जनता धरातल पर दिख रहे विकास कार्यों को नजरअंदाज नहीं करेगी। इस बार फिर इतिहास बनेगा और उत्तराखण्ड में कमल खिलेगा। रही बात आम आदमी पार्टी की, तो चुनाव में वह तो कहीं दौड़ में है ही नहीं।
(7) क्या भाजपा को गढ़वाल के मुकाबले कुमाऊं में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है?
हमारी सरकार जाति और क्षेत्र का कभी भेद नहीं करती। पूरे उत्तराखण्ड को एक मानकर हमने पूरे प्रदेश का संतुलित विकास किया है। मैदान हो या पहाड़ या फिर गढ़वाल हो या कुमाऊं, हमने वहां की जरूरतों को प्राथमिकता के साथ पूरा किया है। ऐसे में हमें हर क्षेत्र से जनता प्राथमिकता के साथ वोट देगी। जनता जानती है कि विकास की इस गति को आगे भी निरन्तर बनाए रखना है।
(8) तराई के सिख किसान बहुल इलाकों में क्या भाजपा को ज्यादा संघर्ष करना पड़ रहा है?
उत्तराखण्ड की जनता किसान आंदोलन की हकीकत को जानती है। यही वजह रही कि हमारे प्रदेश में इस आंदोलन का प्रभाव ना के बराबर रहा। तराई के किसानों ने हमेशा भाजपा को समर्थन और आशीर्वाद दिया, जो इस बार भी मिलेगा। यहां के किसान जानते हैं कि भाजपा ही किसानों की सच्ची हितैषी है। हमने इस बार भी सीएम किसान प्रोत्साहन निधि, कृषि निर्यात नीति और उत्तराखण्ड ऑर्गेनिक्स ब्रांड बनाने की प्रतिज्ञाएं इस बार के अपने संकल्प पत्र में शामिल की हैं।