मुख्यमंत्री और उनके करीबियों के स्टिंग कांड प्रकरण पर विपक्ष ने गंभीर आरोप लगाते हुए सदन में हंगामा किया। लोकायुक्त की नियुक्ति किए जाने पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाया और सदन में स्क्रीन लगाकर स्टिंग दिखाने की मांग उठाई।
विपक्ष ने सवाल खड़ा किया कि अगर मुख्यमंत्री पाक साफ हैं तो जांच से गुरेज क्यों? स्टिंग से जुड़े तथ्यों और रिकार्डिंग की पेन ड्राइव स्पीकर को सौंपी गई। कांग्रेस ने सीबीआई से जांच की मांग भी उठाई। उधर, सत्ता पक्ष ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसके जरिए मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने का आरोप कांग्रेस पर लगाया। दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पीकर ने इस सूचना को अग्राह्य कर दिया।
विधानसभा की सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने प्रश्नकाल स्थगित कर नियम 310 में स्टिंग प्रकरण पर चर्चा की मांग उठाई। विपक्ष ने आरोप लगाया कि जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार कटघरे में हैं। प्रेस क्लब नई दिल्ली में एक चैनल के सीईओ ने प्रेस कान्फ्रेंस कर कई तथ्य मीडिया के समक्ष लगाए हैं, जो गंभीर प्रकृति के हैं।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि अगर प्रदेश सरकार वादे के अनुसार लोकायुक्त नियुक्त कर देती तो विपक्ष उससे मामले की जांच की गुहार लगाता। नियम 310 के तहत अनुमति न मिलने पर विपक्ष वेल मेें उतर आया और नारेबाजी शुरू कर दी। आखिर पीठ से नियम 58 में चर्चा का आश्वासन मिलने पर विपक्ष अपनी दीर्घा में लौटा।