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गैरसैंण पर बहस के बीच विपक्ष का सदन से वाकआउट 

Fri, 09 Jun 2017 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने और  बजट सत्र गैरसैंण में कराने को लेकर सरकार ने कहा कि वह सोच-विचार कर गैरसैंण का स्थायी हल निकालेगी और वह हल राज्य की जनभावना के अनुरूप होगा। गैरसैंण को लेकर शुक्रवार को विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष में जमकर बहस हुई।
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पिछली सरकार के दौरान विस में संकल्प पारित होने के बावजूद गैरसैंण में बजट सत्र आहूत न करने से नाराज विपक्ष ने शुक्रवार को सदन से वाकआउट किया। इससे पूर्व विपक्ष ने प्रदेश सरकार पर गैरसैंण और विधानसभा का अपमान करने का आरोप लगाया।

गैरसैंण स्थायी राजधानी होगी कि नहीं और वहां सत्र होगा तो कब होगा? सरीखे सवाल उछालकर विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया।  
 नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने शुक्रवार को नियम-58 के तहत यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि विधानसभा ने संकल्प लिया था अगला सत्र गैरसैंण में होगा, लेकिन सरकार ने सत्र न करके सदन की मर्यादा का उल्लंघन किया। इससे पर्वतीय क्षेत्र के लोगों की भावना को ठेस पहुंची है। वह ठगा-सा महसूस कर रही है। 
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 इसी दौरान पूर्व विस अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने चिंता जताई कि चुनी हुई सरकार का विस में संकल्प सर्वसम्मति से पारित होता है, लेकिन नई सरकार उसे ठुकरा देती है। ये सदन की अवमानना है। यह सरकार गैरसैंण के प्रति गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार चारधाम यात्रा का बहाना बना रही है, जबकि पूर्व सरकार ने एक सत्र यात्रा के दौरान ही किया।

उन्होंने विस की कार्यसंचालन नियमावली के तहत विधानमंडल भवन परिसर के लिए जरूरी अवस्थापना न जुटाये जाने के तर्क को भी यह कहकर खारिज किया कि पूर्व सरकार ने टेंटों में भी सत्र आहूत किया था, जबकि अब वहां भव्य विधानमंडल भवन व अन्य अवस्थापना का विकास हो चुका है।
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विपक्ष ने ये दागे सवाल

विपक्ष ने ये दागे सवाल
-क्या गैरसैंण में सत्र नहीं होगा?
-गैरसैंण में सत्र कब करेगी सरकार?
-गैरसैंण स्थायी राजधानी होगी या ग्रीष्मकालीन राजधानी?
-गैरसैंण का क्या स्थायी समाधान निकालेंगे?

पंत का जवाब
संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा कि विस का संचालन  कार्यसंचालन नियमावली के प्रावधानों से होता है। पांच वर्षों में पूर्व सरकार ने गैरसैंण में अवस्थापना विकास तो किया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं दे पाई। स्पीकर को अस्थायी रूप से अधिसूचनाएं जारी करने का अधिकार तो है, लेकिन पांच साल तक पूर्व सरकार तुष्टिकरण की नीति अपनाती रही। लेकिन सरकार गैरसैंण में अवस्थापना विकास के साथ वहां स्थायी समाधान निकालेगी। ये स्थायी समाधान जनभावनाओं के अनुरूप होगा।

-गैरसैंण के मामले में कांग्रेस को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। हम इस मामले को लेकर गंभीर हैं और जानते हैं कि जनभावना क्या है। कोई भी कदम उठाने से पहले वहां पर आधारभूत संरचना तैयार करने पर हमारा फोकस है।
-मदन कौशिक, प्रवक्ता, उत्तराखंड सरकार।
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