इसके बाद उन्होंने देश की सर्वोच्च प्रतियोगी परीक्षा में कामयाबी हासिल की और आईएएस बने। आंध्र प्रदेश कैडर मिला।
अनिल पुनेठा के चाचा प्रकाश चंद्र पुनेठा ने बताया कि अभी उनकी करीब डेढ़ साल की सेवा बाकी है। उनकी दो बेटियां हैं। वे अक्सर हर साल नवरात्र में अपने घर लोहाघाट आया करते हैं।
अनिल के पिता का करीब आठ माह पूर्व ही निधन हुआ। अनिल के भाई रमेश चंद्र पुनेठा सिंकदराबाद में रेल विभाग में निदेशक हैं। भुवन चंद्र राय और कृष्णानंद जोशी अपने बचपन के दोस्त की इस कामयाबी से गदगद हैं। कहते हैं कि प्रखर बुद्धि के अनिल का ज्यादातर वक्त किताबों के साथ बीतता था।
- शुरुआत कड़प्पा जिले के राजामपेट में उप जिला मजिस्ट्रेट।
- श्रीकाकुलम के जिला मजिस्ट्रेट।
- स्वास्थ्य, परिवार कल्याण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज के प्रमुख सचिव।
- मुख्य सचिव बनने से पहले भूमि प्रशासनिक प्रमुख।