लंबे समय से यह मामला लंबित होने के कारण आंदोलनकारी संगठनों की ओर से इसके समाधान की मांग उठाई जाती रही है। वहीं, राज्य आंदोलनकारियों के चिह्नीकरण का मुद्दा भी सरकार के एजेंडे में शामिल है। इसके लिए मानक में छूट दी जा सकती है।
प्रस्ताव के तहत समाचार पत्रों में प्रकाशित आंदोलन संबंधी खबरों और उपलब्ध दस्तावेजों को भी चिह्नीकरण का आधार बनाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में समाचार पत्रों में आंदोलनकारी के रूप में नाम प्रकाशित होने वाले लोगों को भी राज्य आंदोलनकारी घोषित करने का रास्ता खुल सकता है। समाचार पत्रों में नाम के साथ ही जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित 10 सदस्यीय कमेटी की संस्तुति को भी चिह्नीकरण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है।
राज्य आंदोलनकारियों के शेष बचे मसलों के निपटारे लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात हुई। जिस पर सीएम का सकारात्मक आश्वासन मिला है। राज्य स्थापना दिवस पर सरकार की ओर से कुछ सौगात मिल सकती है।
-सुभाष बड़थ्वाल, उपाध्यक्ष, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद