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गणतंत्र दिवस 2019: राजपथ पर जीवंत होगी बापू की 'भारत का स्विट्जरलैंड' की यात्रा, जानिए खास बातें

Mon, 07 Jan 2019 09:44 AM IST
shubham न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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गणतंत्र दिवस में शामिल होने वाली अनाशक्ति आश्रम की झांकी
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गणतंत्र दिवस परेड 2019 में इस बार उत्तराखण्ड की ये झांकी सभी को आकर्षित करेगी। इस बार गांधी जी की कौसानी यात्रा से जुड़े अनाशक्ति आश्रम की झांकी को उत्तराखंड की ओर से परेड के लिए चुना गया है।

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सूचना विभाग के उप निदेशक एवं राष्ट्रीय समारोह के नोडल अधिकारी के एस चैहान ने बताया कि राज्य गठन से अब तक 10 बार गणतंत्र दिवस परेड में उत्तराखण्ड की झांकी शामिल हो चुकी है। इस बार भी नई दिल्ली में प्रतिवर्ष आयोजित गणतन्त्र दिवस परेड में उत्तराखंड की झांकी को जगह मिली है।

इसके लिए भारत सरकार द्वारा प्रतिवर्ष राज्य सरकारों व केन्द्र शासित प्रदेशों, मंत्रालयों, विभागों से झांकी के प्रस्ताव आमंत्रित किये जाते हैं। इन प्रस्तावों का परीक्षण रक्षा मंत्रालय द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति द्वारा निर्धारित मानकों के आधार पर किया जाता है।  वहीं अंतिम रुप से चयनित झांकियों का निर्माण भी विशेषज्ञ समिति की देखरेख में ही किया जाता है। 

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गांधी जयंती के 150 वर्ष होंगे पूरे

इस बार महात्मा गांधी की जयंती 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर गणतंत्र दिवस की परेड की थीम महात्मा गांधी जी पर आधारित रखी गई है। उत्तराखंड सरकार की ओर से इस झांकी के लिए प्रस्ताव भेजा गया था। जिसे झांकी के लिए चुना गया है। बता दें कि इस बार के लिए अंतिम रूप से 14 राज्यों एवं 6 मंत्रालयों की झांकी को चयनित किया गया है। 

झांकी में देवभूमि उत्तराखण्ड में कौसानी की झांकी चुनी गई, जिसको महात्मा गांधी जी ने ‘भारत का स्विटजरलैंड’ कहा था। यहां स्थित अनासक्ति आश्रम गांधी जी की यात्रा को ही जीवंत करता है।  महात्मा गांधी ने वर्ष 1929 में इस आश्रम का भ्रमण किया था।  इसी स्थान पर ‘अनासक्ति योग’ पुस्तक की समीक्षा लिखी थी। इस आश्रम का संचालन स्थानीय महिलाओं द्वारा किया जाता है।
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आश्रम में प्रतिदिन सुबह व शाम प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है। साथ ही आश्रम को पुस्तकालय व शोध केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। झांकी के अग्रभाग में अनासक्ति योग लिखते हुए महात्मा गांधी जी की बड़ी आकृति को दिखाया गया है। 

बीच में कौसानी स्थित अनासक्ति आश्रम को दिखाया गया है। आश्रम के दोनों ओर पर्यटक योग व अध्ययन करते हुए नागरिकों व पण्डित गोविन्द बल्लभ पंत को महात्मा गांधी  से वार्ता करते हुए दिखाया गया है। 
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