नैनीताल हाईकोर्ट ने गंगा संरक्षण को लेकर पूर्व में पारित आदेश का अनुपालन न होने पर प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट के साथ कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने साफ कहा है कि आदेश का पालन न होने पर जिलाधिकारियों को अवमानना का नोटिस भी जारी किया जा सकता है। अगली सुनवाई 17 मार्च को होगी।
गंगा संरक्षण को लेकर दो दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने प्रदेश और केंद्र सरकार को करीब 26 बिंदुओं का पालन करने का आदेश दिया था। सोमवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट के अधिवक्ता और याचिकाकर्ता ललित मिगलानी ने कहा कि पूर्व के आदेश का पालन नहीं हो रहा है। इस पर कोर्ट ने खासी नाराजगी जताई।
कोर्ट का कहना था कि गंगा प्रदूषण के नियंत्रण को प्राथमिकता से लिया जाना चाहिए। पूर्व में कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ही विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए थे।
याचिकाकर्ता की शिकायत का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने सभी जिलाधिकारियों को इस मामले में प्रगति रिपोर्ट के साथ 17 मार्च को हाईकोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश जारी किया। यह भी कहा कि अगर दो दिसंबर के आदेश का पालन नहीं होता है तो हाईकोर्ट जिलाधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही से भी संकोच नहीं करेगा।