एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि शिक्षा संकाय ने दो साल पूर्व उत्तराखंड के सीमांत जनपद चमोली के एक क्षेत्र में शैक्षिक, आर्थिक और सामाजिक दशा पर शोध कराया था। इसमें शराब के बारे में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए थे। इसमें बेहद चिंतनीय विषय यह था कि पुरुषों की औसतन मृत्यु आयु 37.5 वर्ष (सामान्य मृत्यु आयु 50 वर्ष से ऊपर को छोड़कर) आई थी।
वजह शराब की वजह से बीमारी लगना था। विवि के गेस्ट शिक्षक आशु रौलेट ने चमोली के जोशीमठ क्षेत्र में परिवारों के सामाजिक स्तर का अध्ययन किया। शोध के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में 50 फीसदी लोगों की मृत्यु घर में बनाए जाने वाली पारंपरिक शराब (कच्ची शराब) से हुई हैं।
किसी घर में शराब के सेवन से 35 साल में तो किसी घर में 40 साल में घर के कमाऊ सदस्य की मौत हो गई। इस वर्ग में सिर्फ तीन फीसदी ही ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट हैं। 21 फीसदी ने प्राथमिक और 18 फीसदी ने माध्यमिक के बाद पढ़ाई छोड़ दी। शराब पीने से कमाऊ सदस्य की असामयिक मौत ने इनकी पढ़ाई छुड़ा दी। आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर बच्चों को पढ़ाई छोड़ व्यवसाय करना पड़ा।
भले-बुरे की पहचान खत्म कर देती है शराब
शराब मनुष्य के शरीर, स्नायु तंत्र और दिमाग को लगभग खोखला कर देती है। राजकीय संयुक्त अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डा. लोकेश सलूजा बताते हैं कि शराब की ओवरडोज व्यक्ति के सोचने-समझने की शक्ति को कमजोर कर देती है। शराब दिमाग के नियंत्रण केंद्र पर एक तरह से कब्जा कर देती है, जिससे शराबी को भले-बुरे का पता नहीं चलता।
ओवरजजमेंट की वजह से शराबी दुर्घटनाओं के शिकार हो जाते हैं। जबकि अस्पताल के वरिष्ठ निश्चेतक डा. आनंद राणा बताते हैं कि ज्यादा मात्रा में शराब के सेवन से मनुष्य कोमा की हालत में चला जाता है। वह कहते हैं कि शराब के लगातार सेवन से लीवर सिरोयसिस (गांठ बनना) हो जाता है। यानी लीवर की कोशिकाएं खत्म होने लगती हैं। शराब के सेवन से अल्सर, लीवर व पेट का कैंसर, गले का कैसर, शुगर और नशों में कमजोरी होने लगती है। यदि मनुष्य समय पर नहीं संभले, तो मौत हो जाती है।