उत्साह का आलम ये था कि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के विधानसभा भवन के बाहर पहुंचने पर, जो भी गैरसैंण की बात करेगा... का नारा लगाने से खुद को नहीं रोक पाए। स्पीकर ने नारा लगाया...जो भी गैरसैंण की बात करेगा..., बाकी लोगों ने इस नारे को यूं पूरा किया.....उत्तराखंड पर राज करेगा। स्पीकर पहले से ही गैरसैंण राजधानी के समर्थक रहे हैं और खुलकर इस बात को स्वीकार भी करते रहे हैं।
विपक्ष का संजीदा अंदाज, नियम कायदों की बात
सदन में दिन भर विपक्ष पर शायद ग्रीष्मकालीन राजधानी का दबाव ही था कि नियम कायदों पर अधिक ध्यान देता रहा। खुद नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश का कहना था कि सरकार ने विपक्ष को विश्वास में लिए बिना ही यह घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बजट भाषण के तहत यह घोषणा की और बजट में राजधानी का मुद्दा कहीं था ही नहीं। विपक्ष ने सदन में नेता सदन के माला पहनकर पहुंचने तक को मुद्दा बनाया। मदन कौशिक ने पीठ से जिला विकास प्राधिकरण के मामले में विपक्ष की चर्चा की मांग न मानने को कहा तो विपक्ष पीठ की ओर से निर्देेश पर अटक गया।
ग्रीष्मकालीन राजधानी की खुशी में सुबह होली, शाम को दिवाली
विधानभवन भराड़ीसैंण के साथ ही मंत्रियों और विधायकों के आवास दीपों से जगमग हुए। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने की खुशी भराड़ीसैंण में सूरज के ढलने के समय भी दिखाई दी। दीपावाली की तरह ही विधानभवन के साथ ही मंत्रियों और विधायकों के आवास भी दीये और मोमबत्ती की रोशनी से नहा उठे। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि सुबह होली खेली गई थी।
शाम को दीपावाली मनाई। मुख्यमंत्री ने राज्य गठन के लिए शहीद हुए आंदोलनकारियों को याद किया। स्पीकर प्रेमचंद अग्रवाल, संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक सहित अन्य मंत्री इस उत्सव में शामिल हुए। सबने एक दूसरे को मिठाई थी। दीपोत्सव में विधायक, विधानसभा के कर्मचारी आदि शामिल हुए।