एस्कैप चैनल - सर्वानंद घाट से शमशान घाट खड़खड़ी व हर की पैड़ी से होते हुए डामकोठी तक व डामकोठी के पश्चात सतीघाट कनखल होते हुए दक्ष मंदिर तक बहने वाले भाग को एस्केप चैनल माना जाता है। उक्त क्षेत्र में जल प्रवाह नियंत्रित होने के कारण बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
एनजीटी साफ कर चुकी है क्या है अतिक्रमण
2016 के आदेश के तहत यह भी साफ किया गया था कि नदी के तटीय क्षेत्र में किस सीमा तक निर्माण प्रतिबंधित होगा। एनजीटी के आदेश के तहत नदी तट से 200 मीटर तक का क्षेत्र प्रतिबंधित क्षेत्र माना गया और इसमें सिर्फ घाट का निर्माण, नदी तट विकास ही अनुमति दी गई। 200 मीटर से 300 मीटर तक का क्षेत्र रेग्यूलेटरी जोन माना गया और इस क्षेत्र में मठ, मंदिर आदि के सशर्त निर्माण को मंजूरी दी गई।
कब क्या हुआ
14 दिसंबर 2016 - एस्केप चैनल से संबंधित शासनादेश जारी किया गया। यह शासनादेश उस समय सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने आवास विभाग की ओर से जारी किया था।
2017- विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने इस शासनादेश को निरस्त करने का आश्वासन दिया था। उसी समय से शासनादेश को निरस्त करने की मांग हो रही थी।
14 जुलाई, 2020 - पूर्व सीएम हरीश रावत हरिद्वार में संतों के बीच पहुंचे और उन्होंने कहा कि उनसे भूल हो गई है, त्रिवेंद्र सरकार इस भूल को सुधारे।
16 जुलाई, 2020- प्रदेश सरकार ने कहा कि हरीश रावत की सरकार के दौरान जारी हुआ आदेश निरस्त होगा।
23 नवंबर, 2020- कुंभ की तैयारी बैठक में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एस्केप चैनल के आदेश को निरस्त करने की घोषणा की और कहा कि जल्द ही यह आदेश जारी होगा।
02 दिसंबर, 2020- शासन की ओर एस्केप चैनल को निरस्त करने का आदेश जारी।