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उत्तराखंड: परिवहन निगम की सुस्ती और लापरवाही....मरम्मत के इंतजार में पहाड़ की 42 फीसदी निगम की बस

Sun, 24 Sep 2023 05:00 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

पर्वतीय डिपो में 82 बस हैं, जिनमें से अभी करीब 32 बस ट्रांसपोर्ट नगर स्थित रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी हैं। इन बसों के कलपुर्जे समय से उपलब्ध न होने की वजह से मरम्मत नहीं हो पा रही है।

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उत्तराखंड रोडवेज बस - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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परिवहन निगम की सुस्ती और लापरवाही से पहाड़ के यात्री खुद काे ठगा महसूस कर रहे हैं। हालात ये हैं कि ग्रामीण डिपो और पर्वतीय डिपो की करीब 42 प्रतिशत बस वर्कशॉप में मरम्मत के इंतजार में खड़ी हैं।

पहाड़ में लोग रोजाना बस का इंतजार करते हैं। परिवहन निगम के अलग-अलग डिपो के माध्यम से बस संचालन किया जाता है। पहाड़ के लिए विशेषकर पर्वतीय डिपो की बस संचालित की जाती हैं। पर्वतीय डिपो में 82 बस हैं, जिनमें से अभी करीब 32 बस ट्रांसपोर्ट नगर स्थित रोडवेज वर्कशॉप में खड़ी हैं।

इन बसों के कलपुर्जे समय से उपलब्ध न होने की वजह से मरम्मत नहीं हो पा रही है। इसके चलते पर्वतीय मार्गों पर केवल 48 से 50 बस ही संचालित हो रही हैं। इसी प्रकार, ग्रामीण डिपो में करीब 50 बस हैं, जिनमें से 11 बस वर्कशॉप में मरम्मत के लिए खड़ी हैं।

इनकी मरम्मत न होने की वजह से भी सवारियों को परेशानी उठानी पड़ रही है। हालांकि, परिवहन निगम के महाप्रबंधक संचालन एवं तकनीकी दीपक जैन का कहना है कि मरम्मत के बाद बस वापस संचालन में आ रही हैं

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सरकार देती है प्रतिपूर्ति फिर भी संचालन नहीं

राज्य सरकार प्रदेश के सभी पर्वतीय मार्गों पर संचालन के लिए प्रतिपूर्ति देती है। यानी सवारियां भले ही कम मिलें, लेकिन रोडवेज बस चलाना अनिवार्य है। बावजूद इसके निगम संचालन को तैयार नहीं है। अनुबंध से नई बस तो लानी चाहता है, लेकिन अपनी पुरानी बस की मरम्मत करके संचालित करना नहीं चाहता।

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पहाड़वासियों के साथ हो रही ठगी

रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष प्रेम सिंह रावत का कहना है कि पर्वतीय मार्गों पर परिवहन निगम की वजह से यात्री खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। निगम समय से कलपुर्जे उपलब्ध नहीं करा पाता, जिससे संचालन प्रभावी नहीं हो रहा। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि निगम जानबूझकर पर्वतीय मार्गों पर बस संचालन का नेटवर्क मजबूत करना नहीं चाहता।

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