कई बार ऐसी शिकायतें आती हैं कि अस्पताल रोगी व उसके परिजनों को कागजातों की औपचारिकता में उलझा देते हैं, जिससे इलाज में देरी के कारण रोगी की जान को खतरा हो जाता है।
उन्होंने प्रस्ताव रखा कि इमरजेंसी मामलों में सूचीबद्ध अस्पताल रोगी का तत्काल इलाज शुरू करेंगे और इसकी सूचना निगम को देने की जिम्मेदारी भी अस्पताल प्रबंधन की होगी। इसके लिए निगम को वेबसाइट या एप्लीकेशन की मदद से ऑनलाइन सूचना दी जाए।
जो अस्पताल इसमें हीलाहवाली करेंगे, उनके बकाया बिलों का तत्काल प्रभाव से भुगतान रोक दिया जाए। उनके इस प्रस्ताव को बोर्ड ने सर्वसम्मति से अनुमोदित कर दिया। उन्होंने निगम के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इस संबंध में सभी सूचीबद्ध अस्पतालों, निगम के अस्पतालों और राज्य सरकार को पत्र जारी कर सूचित कर दें। बैठक में अपर सचिव उमेश नारायण पांडे, निगम के क्षेत्रीय निदेशक मोहम्मद इरफान और बोर्ड के अन्य सदस्य उपस्थित थे। बैठक का संचालन रवि चंद्रा ने किया।
प्रदेश में वे संस्थान भी अब कर्मचारी राज्य बीमा निगम के दायरे में आ जाएंगे, जहां पांच कर्मचारी हैं। राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए 10 से 20 बेड के अस्पतालों को ईएसआई के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा। ये निर्णय भी बोर्ड बैठक में लिए गए। इसके अलावा स्वैच्छिक ईएसआई के लिए भी प्रोत्साहन देने का फैसला हुआ।
- कोटद्वार में राज्य कर्मचारी बीमा निगम 300 बेड का सुपर स्पेशल अस्पताल बनाएगा।
- स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने के लिए कर्मचारी राज्य बीमा निगम के ढांचे का पुनर्गठन होगा।
- एसएसओ, सहायक, यूडीसी, एलडीसी, एमटीएस समेत अन्य संवर्गों के पद होंगे सृजित।
- 100 बेड के अस्पताल के लिए सेलाकुई में सिडकुल से भूखंड की मांग की जाएगी।
- हरिद्वार में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण 18 महीने में पूरा किया जाएगा।
- रुद्रपुर में रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी के मद्देनजर निगम अतिरिक्त अस्पताल खोलेगा।
- रुद्रपुर में 50 बेड का अस्पताल तीन महीने में शुरू करने का लिया गया फैसला।
- हर जिले में ईएसआई अस्पताल स्थापित करने के लिए डीएम से भूमि की मांग की जाएगी।
- अस्पताल के साथ ही पैथोलॉजी लैब की भी मिलेगी सुविधा, आउटसोर्स से रखेंगे स्टाफ।
- अस्पताल और क्लीनिक ऑनलाइन जुड़ेंगे और एप्लीकेशन के माध्यम से अपडेट जारी होगा।