हिमालयी राज्यों में वनों की स्थिति
हिमालयी राज्यों में हिमाचल प्रदेश में 66.52, उत्तराखंड में 71.05, सिक्किम में 82.31, अरूणाचल प्रदेश 79.33, मणिपुर में 74.34, मेघालय में 76.00, मिजोरम में 84.53, नगालैंड में 73.90, त्रिपुरा में 60.02, असम में 34.21 फीसदी वन क्षेत्र मौजूद हैं।
(नोट: आंकड़े एफएसआई की ओर से तैयार इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट-2021 के अनुसार )
पर्यावरणीय सेवाओं का मूल्य
- भोपाल के इंडियन इंस्टीट्यूट फॉर फॉरेस्ट मैनेजमेंट के सहयोग से तैयार रिपोर्ट ‘ग्रीन एकाउंटिंग ऑफ फॉरेस्ट रिसोर्स, फ्रेमवर्क फॉर अदर नेचुरल रिसोर्स एंड इंडेक्स फॉर सस्टनेबल एनवायरमेंटल परफॉर्मेंस फॉर उत्तराखण्ड स्टेट’ में राज्य के वन संसाधनों के आर्थिक महत्व को मौद्रिक रूप में मापने का प्रयास किया गया।
- राज्य की 18 वन सेवाओं का फ्लो वेल्यू 95,112,60 करोड़ और तीन सेवाओं की स्टॉक वेल्यू 14,13,676.20 करोड़ आंकी गई है।
- उत्तराखंड हर वर्ष पूरे देश को 95 लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की पर्यावरणीय सेवाएं मुहैया करा रहा है।
- यदि किसी राज्य को उसके पर्यावरणीय उत्पादों का भुगतान किया जाए तो इतनी रकम राज्य की आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सकती है।
जीईपी पर भी नहीं बनी बात
उत्तराखंड सरकार ने जीडीपी की तर्ज पर जीईपी (ग्रॉस इंवायरमेंटल प्रोडक्ट) के आकलन का खाका तैयार कर केंद्र सरकार के सामने रखा है, लेकिन अब तक इस पर भी बात नहीं बन पाई है।