हमारे वीर जवान सेना और अर्द्धसैनिक बलों में शामिल होकर देश की रक्षा में अपना सब कुछ समर्पित करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में मेरा हमेशा मानना रहा है कि ईमानदारी और पारदर्शिता से जनसेवा की जाए।
सुशासन के बल पर ही विकास के नए आयाम प्राप्त हो सकते हैं। इसके बल पर ही हम उत्तराखंड को आदर्श राज्य बना सकते हैं। उत्तराखंड संभावनाओं का प्रदेश है। विकास एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। उत्तराखंड ने 18 वर्षों की सफल यात्रा पूर्ण कर ली है, इस युवा राज्य के सपनों को साकार करने में हम सबको अपना योगदान देना होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था ‘उठो, जागो और तब तक रुको नहीं, जब तक लक्ष्य हासिल न हो जाए’। इसे हमें सार्थक करने की पूरी कोशिश करनी होगी। उन्होंने राज्यवासियों का आह्वान किया कि सभी लोग संकल्प लें कि हर व्यक्ति उत्तराखंड प्रदेश और भारत वर्ष के समग्र विकास और समृद्धि के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देगा। यही शहीद राज्य आंदोलनकारियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। सभी को मिलकर उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है।
राज्य गठन के बाद उत्तराखंड ने औद्योगिक निवेश में लंबी छलांग लगाई है। 18 साल के भीतर प्रदेश में निवेश नौ हजार करोड़ से बढ़कर 40 हजार करोड़ तक पहुंचा है। मैदानी जिले देहरादून, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में बड़े उद्योगों में निवेशकों ने सबसे ज्यादा निवेश किया है। राज्य में पहली बार आयोजित इंवेस्टर्स समिट के जरिये सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, आयुष, हर्बल, सोलर ऊर्जा जैसे तमाम सेक्टरों में उद्योगों की जड़ें जमाने की पहल की है। इससे पहाड़ों में रोजगार के नए अवसर मिलने से पलायन रुकेगा।
वर्ष 2002 में उत्तराखंड बनने से पहले इस क्षेत्र में नौ हजार करोड़ का निवेश था। वर्ष 2003-04 में विशेष औद्योगिक पैकेज मिलने से बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश करने के लिए आगे आई। विनिर्माण, फार्मास्युटिकल्स सेक्टर में निवेशकों ने देहरादून के सेलाकुई, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जिला के काशीपुर, सितारगंज, रुद्रपुर में उद्योग स्थापित किए। 18 साल के अंतराल में उत्तराखंड में एमएसएमई क्षेत्र के 57 हजार छोटे उद्योग और 280 बड़े उद्योगों में करीब 40 हजार करोड़ का निवेश हुआ। इससे 3.75 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला। राज्य की जीडीपी में अकेले उद्योगों का 40 प्रतिशत योगदान है।
मैदानों की तर्ज पर पहाड़ों में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए सरकार ने खासतौर पर पर्यटन, खाद्य प्रसंस्करण, हर्बल, कृषि, बागवानी, आयुष व सोलर ऊर्जा, सर्विस सेक्टर को चिन्हित किया है। राज्य में पहली बार आयोजित इंवेस्टर्स समिट के जरिये भी सरकार ने 1.20 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। इसमें पर्वतीय क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। घर द्वार पर ही रोजगार उपलब्ध होने से पहाड़ों से पलायन की समस्या दूर होगी।
उत्तराखंड में औद्योगिक निवेश के लिए माहौल अच्छा और सरकार की नीतियों के चलते निवेशक राज्य में निवेश करने में रुचि दिखा रहे हैं। राज्य गठन के बाद प्रदेश में निवेश में तेजी आई है। इंवेस्टर्स समिट के माध्यम से भी आने वाले समय में राज्य में औद्योगिक निवेश बढ़ेगा।
- सुधीर चंद्र नौटियाल, निदेशक उद्योग विभाग