पुलिस लाइन में ही पुलिस और पीएसी के करीब 35 कर्मचारी डेंगू की चपेट में हैं। ऋषिकेश कोतवाली में डेंगू पीड़ितों की संख्या 25 पार कर गई है। सूत्रों के मुताबिक करीब 150 पुलिसकर्मी फिलहाल बेड पर हैं। एसपी सिटी श्वेता चौबे भी दो दिन से वायरल की चपेट में है। जबकि, उनके स्टेनो डेंगू से पीड़ित हैं।
इसके अलावा एसएसपी के पीआरओ शाखा प्रभारी धर्मेंद्र रौतेला और धर्मेंद्र बिष्ट डेंगू और उप निरीक्षक राहुल कापड़ी वायरल से पीड़ित हैं। एसएसपी अरुण मोेहन जोशी अस्पताल और घर पहुंचकर इन पुलिसकर्मियों का हालचाल पूछ चुके हैं।
इंस्पेक्टर विकासनगर प्रदीप बिष्ट के अलावा कई शाखाओं के प्रभारी डेंगू से पस्त हैं। सचिवालय में तैनात पीएसी के कई जवान भी डेंगू से पीड़ित हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अरुण मोहन जोशी ने माना कि डेंगू पीड़ित पुलिसकर्मियों का आंकड़ा बढ़ा है। इसी के मद्देनजर सीओ सिटी शेखर सुयाल को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
कोरोनेशन अस्पताल में थैलेसीमिया मरीजों के लिए तैनात नर्स को डेंगू हो गया है। जिसकी वजह से थैलेसीमिया पीड़ित खून चढ़वाने के लिए पांच दिन से भटक रहे हैं। दरअसल, कोरोनेशन अस्पताल में थैलेसीमिया वार्ड में चार नर्सों के पद स्वीकृत हैं। इनमें दो पुरूष और दो महिलाओं के पद हैं। लंबे समय से यहां दो नर्स (एक पुरुष) काम कर रहे थे। उनमें से करीब एक माह पहले पुरुष नर्स ने काम छोड़ दिया। उसके बाद एक नर्स शेष थी, लेकिन वह भी पिछले सप्ताह डेंगू होने पर छुट्टी चली गईं।
अब अस्पताल में खून चढ़ाने आने वाले बच्चों को खून चढ़वाने वाला कोई नहीं है। बच्चों के परिजनों ने बताया कि कई मरीज निजी अस्पतालों में खून चढ़वाने को मजबूर हैं। इस संबंध में सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने बताया कि सोमवार से एक स्टाफ को लगाया है। इससे मरीजों को थोड़ी राहत मिली है। नर्सों की भर्ती के लिए कई बार सीएमओ को लिखा जा चुका है। लेकिन, एनएचएम कोटे से नर्सों की भर्ती नहीं हो रही है।
एक अस्पताल का स्टाफ आने को तैयार नहीं
शहर के एक बड़े अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ मौजूद है। लेकिन, सूत्रों का कहना है कि वह स्टाफ वहां से आने को तैयार ही नहीं है। कई बार सीएमओ स्तर से इनके ट्रांसफर की कोशिश की। लेकिन राजनीतिक पकड़ के कारण वह स्टाफ वहां से आने को तैयार ही नहीं है।