योजना का नाम एनपीए(करोड़ रुपये में)
प्रधानमंत्री रोजगार सर्जन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) 16.71
स्पेशल कंपोनेंट प्लान (एससीपी) 2.90
वीर चंद्र सिंह गढ़वाली योजना (वीसीएसजीवाई) 47.56
राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (एनयूएलएम) 1.77
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) 4.26
डीआरआई स्कीम 1.25
मुद्रा योजना 106.02
डेयरी उद्यमिता विकास योजना (डीईडीएस) 11.78
स्टैंडअप इंडिया 3.93
प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) 0.32
वैसे तो इन योजनाओं के तहत एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, नैनीताल बैंक, यूनियन बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, उत्तराखंड ग्रामीण बैंक, सहकारी बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक से लोन लिया है लेकिन इनमें सहकारी बैंक की हालत सबसे खराब है। सहकारी बैंक का सर्वाधिक 75 प्रतिशत एनपीए हो गया है। ऐसे में इस बैंक का अस्तित्व ही संकट में आ गया है। अपर मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने भी इस पर चिंता जताई।
क्या होता है एनपीए
एनपीए मतलब नोन परफॉर्मिंग एसेट। यह ऐसा पैसा होता है, जिसे बैंक लोन के रूप में किसी ग्राहक को देता है लेकिन वह लौटाता नहीं है। बैंक इसमें से जिस पैसे को रिकवर करने में असफल हो जाता है, उसे एनपीए में शामिल कर दिया जाता है। इसका मतलब यह है कि इस पैसे का देश की अर्थव्यवस्था में कोई योगदान नहीं रह जाता है।