ये दोनों अधिकारी राज्य के वरिष्ठतम आईएएस अधिकारियों में शुमार हैं। इनके अलावा इस सूची में वर्ष 1992 बैच के राकेश कुमार, वर्ष 2005 बैच के रंजीत सिन्हा, इसी बैच से आने वाले जिलाधिकारी देहरादून एसए मुरुगेषन, वर्ष 2006 बैच के आशीष जोशी और सुशील कुमार, वर्ष 2007 बैच के नीरज खैरवाल और उनकी पत्नी व वर्ष 2009 बैच की आईएएस अधिकारी ज्योति नीरज खैरवाल, वर्ष 2010 बैच की सोनिका, वर्ष 2013 बैच के सुनीत कुमार और वर्ष 2015 बैच के निखिल खंडेलवाल के नाम भी शामिल हैं।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सेवानिवृत्ति के करीब आने वाले कई अधिकारी अचल संपत्ति का ब्योरा दाखिल करने से परहेज करने लगते हैं, पर नए अधिकारियों को इसका ध्यान रखना चाहिए। भारत सरकार में सूचीबद्धता न होने की दशा में उन्हें भविष्य में तमाम मुश्किलें झेलनी पड़ सकती हैं।
समय से रिटर्न फाइल करने संबंधी पत्र पूर्व में जारी किया गया था, जिसमें ऑनलाइन रिटर्न न दाखिल करने वाले अधिकारियों को विजिलेंस क्लियरेंस न देने की बात कही गई थी। उक्त अधिकारियों ने रिटर्न क्यों नहीं फाइल किया, यह दिखवाया जाएगा।
- उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव