बता दें कि उत्तराखंड में 108 सेवा के पूर्व कर्मचारियों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविद को ज्ञापन भेजकर इच्छा मृत्यु देने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि 11 वर्ष की सेवा के बाद उन्हें हटा दिया गया। पिछले कई दिनों के आंदोलन के बावजूद सरकार उनके समायोजन में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
हाल ही में पूर्व कर्मचारियों के समर्थन में कांग्रेसी नेता हरीश रावत ने भी धरना दिया था। इस दौरान उन्होंने कर्मचारियों के साथ उपवास किया था। उन्होंने कहना था कि 108 के पूर्व कर्मचारियों की मांग जायज है। सरकार कर्मचारियों की अनदेखी कर रही है। सरकार को कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान देना चाहिए।
- कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें नई कंपनी कैंप में समायोजित किया जाए।
- उन्हें पहले के जितना वेतन दिया जाए।
- जहां वे तैनात थे वहां पर ही तैनाती दी जाए।
- नई कंपनी में अनुभवहीन कर्मचारियों को भर्ती न किया जाए।
- नई कंपनी के साथ भी पहले के जैसा ही अनुबंध किया जाए।