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Uttarakhand: बंजर हो या खाली पड़ी जमीन...अब साफ्टवेयर बताएगा कौन से पेड़ लगाएं, इस तकनीक पर हो रहा काम

Tue, 20 Aug 2024 01:02 PM IST
अलका त्यागी अंकित गर्ग, संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून

सार

Uttarahand News: पंजाब वन विभाग की ओर से दिए गए प्रोजेक्ट के तहत पूरे प्रदेश के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है।
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पौधा - फोटो : iStock
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विस्तार
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अक्सर हमें पता नहीं होता कि हमारे प्रदेश में बड़ी संख्या में पेड़ लगाने के लिए कौन सी जगहें खाली पड़ी है और वहां किस तरह के पौधे लगाए जाने उपयुक्त होंगे। कई बार सरकारी अभियान चलाकर बड़ी संख्या में पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन वर्षों बाद उनका नामोनिशां नहीं दिखाई देता। अब एफआरआई का शोध इस समस्या का पूरी तरह समाधान करेगा। पायलट प्रोजेक्ट के तहत पूरे पंजाब प्रांत के लिए एफआरआई साफ्टवेयर तैयार कर रहा है। देश में अपनी तरह के इस पहले प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि प्रदेश के नक्शे पर किसी भी जगह क्लिक करते ही पता चलेगा कि वहां किस तरह की जलवायु और मिट्टी है और किस तरह के पौधे लगाएं।

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वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) देहरादून के वैज्ञानिक नीलेश यादव ने बताया कि पंजाब वन विभाग की ओर से दिए गए प्रोजेक्ट के तहत पूरे प्रदेश के लिए डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) साफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है। इस साफ्टवेयर के जरिए प्रदेश के नक्शे पर कहीं भी क्लिक करेंगे तो उसके अक्षांश और देशांतर के साथ ही संबंधित जगह की मिट्टी, उसकी प्रकृति, तापमान, जलवायु, मौसम आदि की सभी जानकारी सामने आ जाएगी। वह मिट्टी दलदली है, उपजाऊ है या बंजर इस समेत सभी जानकारी मिलेगी। इसके बाद साफ्टवेयर यह बताएगा कि उस जगह पर कौन से ऐसे पौधे हैं जो जीवित रहेंगे। इस शोध में इजरायल की बेन गुरियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रूवन योसेफ और श्रेय रखोलिया भी शामिल हैं। ऐसे में यह साफ्टवेयर उत्तराखंड समेत अन्य प्रदेशों में वनीकरण एवं वन प्रशासन को नीतियों के निर्माण करने में मददगार हो सकता है। 

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150 साल पुरानी लिखी किताबें बनी मददगार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह डाटा कहां से आएगा कि किस जगह कौन सा पौधा जीवित रहेगा। इसके लिए वैज्ञानिकों का सहारा बनी है एफआरआई में पेड़ों पर लिखी गई करीब 150 साल पुरानी ट्रूप की सिल्वीकल्चर ऑफ इंडियाज ट्रीज और आरके लूना की लिखी प्लांटेशन ट्रीज जैसी पुस्तकें। जिनमें असंख्य पेड़ों से जुड़ी सभी जानकारी है। जिन्हें कड़ी मेहनत के साथ साफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) मॉड्यूल के सहारे पुस्तक की इन जानकारियों को मिट्टी की विशेषता के साथ जोड़कर पौधरोपण की सटीक जानकारी दी जाएगी।

इसरो और आईएसआरआईसी के आंकड़े पौधरोपण में सहायक
साफ्टवेयर में इसरो से संबंधित नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) और आईएसआरआईसी (इंटरनेशनल सॉयल रेफरेंस एंड इनफॉरमेशन सेंटर) के आंकड़ों की मदद से किसी भी जगह की मिट्टी की प्रकृति, वहां साल भर रहने वाले मौसम की जानकारी, बारिश, धूप, तापमान आदि की जानकारी जुटाई जा रही है। जो सही तरीके से पौधरोपण में सहायक होगी।

पंजाब प्रांत में 12500 पैच में पौधरोपण के लिए तलाशे
शोध के दौरान पंजाब प्रांत में साढ़े बारह हजार पैच चिह्नित किए गए, जहां बंजर जमीन या खारे पानी की जमीन जैसी मिट्टी है। यहां पर पौधरोपण कर जमीन को हरा भरा बनाया जा सकता है। इसी जमीन में जीवित रहने वाले पौधों की जानकारी भी जुटाई गई है।
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