उधर, पत्रिका के संपादक राम प्रताप मिश्र साकेती का कहना है कि फॉन्ट कन्वर्ट करते समय यह गलती हुई है। इस बारे में उन्होंने संगठन महामंत्री अजेय कुमार को पूरी जानकारी दे दी है।
संगठन के भीतर यह सवाल उठ रहे हैं कि पत्रिका के प्रकाशन की व्यवस्था के लिए जिम्मेदारी तय होने के बाद भी पत्रिका में गलतियां कैसे छूट गईं? पत्रिका के पेज चार यानी प्रस्तावना में गलतियां हैं। बहरहाल, इसे लेकर पार्टी के भीतर खासी गहमागहमी है तो वहीं पार्टी के जिम्मेदार लोग इसे बात का बतंगड़ बनाना बता रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, हर साल मुख पत्रिका की 25 हजार प्रतियां प्रकाशित होती हैं, लेकिन पार्टी नेताओं का कहना है कि 3400 प्रतियां ही प्रकाशित हुईं। जिनका वितरण रोक दिया गया है। पुन: प्रकाशित कराकर पत्रिका का वितरण किया जाएगा।