जिला पंचायत की अध्यक्ष रही नसरीन को विजय गिरी की ओर से अविश्वास प्रस्ताव लाकर हटाया गया था। अविश्वास प्रस्ताव के बाद नसरीन सैफी बसपा छोड़ सपा में शामिल हो गई थी।
रिपोर्ट में कहा गया कि आरोपी सपा के मंत्री, सांसद, जिला अध्यक्ष एवं अन्य पदाधिकारी जिला पंचायत के सदस्यों पर दबाव बनाकर अपने पक्ष में मतदान कराना चाहते हैं। आरोपियों ने 17 जनवरी की रात ढाई बजे लक्ष्मण झूला स्थित शिवा रिजॉर्ट में घुसे और जिला पंचायत सदस्यों से मारपीट कर उनका अपहरण किया।
आरोप लगाया कि तीन से चार पुलिस की जीप और 40 अन्य वाहनों के साथ आए आरोपी सदस्यों को जबरन अपनी गाड़ी में ले गए। जिनका अपहरण हुआ उनमें चार महिलाएं और दो युवतियां भी शामिल थी।
पुलिस की ओर से मामले में दस लोगों को आरोपी बनाया गया। मामले की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार सिंह की अदालत में हुई सुनवाई में अभियोजन की ओर से 48 में से 38 गवाह पेश किए गए। सहायक अभियोजन अधिकारी श्रद्धा रावत ने बताया कि आरोप साबित न होने पर अदालत ने सभी को बरी कर दिया।
पुलिस की ओर से मामले में यूपी के पूर्व उद्यान मंत्री मूलचंद चौहान, पूर्व मंत्री एवं वर्तमान में विधायक मनोज पारस, बिजनौर के पूर्व सपा जिलाध्यक्ष राशिद हुसैन, नगीना के पूर्व सांसद यशवीर धोबी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य रजा अली परवेज, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष शेरवाज पठान, पूर्व जिला पंचायत सदस्य अमजद अहमद, जिला पंचायत सदस्य अफजलगढ़ कपिल गुर्जर, रफी सैफी, जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष अमित कुमार को आरोपी बनाया गया था।
जिस घटनास्थल की बात की जा रही थी मैंने वे स्थान आज तक नहीं देखा, इस तरह का मुकदमा दर्ज कराकर हमारी छवि खराब करने का प्रयास किया गया, हमें अदालत से न्याय मिला है।
-मूलचंद चौहान, पूर्व मंत्री यूपी
राजनीतिक षड़यंत्र के तहत हमारे खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया था। इससे हमारी राजनीतिक एवं सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तियों पर इस तरह केस दर्ज नहीं किया जाना चाहिए
-मनोज पारस, विधायक नगीना एवं पूर्व मंत्री