क्या उर्दू भाषा की जानकारी के बिना उर्दू का अनुवाद किया जा सकता है? इसका जवाब नहीं में होगा, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में उर्दू अनुवादक के पद पर आवेदन करने के लिए उर्दू की जानकारी की कोई बाध्यता ही नहीं है। गौरतलब यह है कि इसमें आशुलिपि का डिप्लोमा मांगा गया है।
एक पद के लिए आवेदन
शासन ने उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद के माध्यम से समूह ग के सैकड़ों पदों पर भर्ती निकाली है। अल्पसंख्यक विभाग में उर्दू अनुवादक के एक पद के लिए आवेदन मांगे गए हैं।
इसके लिए इंटरमीडिएट के साथ आईटीआई से आशुलिपि का डिप्लोमा अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं आशुलिपि में 80 शब्द प्रति मिनट की गति रखी गई है, जबकि उर्दू से इंटर, स्नातक, स्नातकोत्तर या उर्दू मोअल्लिम का कहीं उल्लेख नहीं है।
घोषणा 50 की, निकाला एक पद
बीते माह केबिनेट की बैठक में उर्दू अनुवादकों के करीब 50 पदों पर भर्ती की घोषणा की गई थी, लेकिन मात्र एक पद पर ही विज्ञप्ति जारी की गई। इतना ही नहीं अल्पसंख्यक विभाग में कनिष्ठ सहायक के चार पदों के लिए जारी विज्ञप्ति को दो जगह दर्शाया गया है।
मायूस हुए मोअल्लिम बेरोजगार
वर्षों से नियुक्ति की बाट जोह रहे मोअल्लिम बेरोजगार मायूस हो गए। आचार संहिता लग गई, लेकिन उर्दू शिक्षकों की भर्ती की ओर प्रदेश सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। उर्दू मोअल्लिम बेरोजगार संगठन के संयोजक कारी अब्दुल मुईद ने बताया प्रदेश भर में उर्दू शिक्षकों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, लेकिन प्रदेश सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही।