विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के बेटे की नियमों के खिलाफ नियुक्ति के मामले के बाद अब सरकार हरकत में आ गई है। उपनल के जरिये वर्ष 2016 के बाद नौकरी पाने वाले सभी अभ्यर्थियों की जांच होगी। इसमें किसी भी तरह की गड़बड़ी मिलने पर उनका अनुबंध तत्काल रद्द कर दिया जाएगा। दस्तावेजों के साथ ही उनकी सैन्य पृष्ठभूमि की भी जांच की जाएगी।
विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के पुत्र पीयूष अग्रवाल को जल संस्थान में सहायक अभियंता के पद पर नियुक्ति दिए जाने के बाद उपनल के कामकाज को लेकर खासे सवाल उठ रहे थे। कोर्ट का आदेश और शासनादेश होने के बावजूद उपनल के माध्यम से गैर सैन्य पृष्ठभूमि के लोगों को नौकरी दिए जाने के आरोप लग रहे हैं। सोमवार को खुद विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने अपने पुत्र के जल संस्थान से इस्तीफा देने का खुलासा किया।
इसके कुछ देर बाद ही उपनल के एमडी ब्रिगेडियर पीपीएस पाहवा ने पांच जुलाई 2016 के बाद हुई सभी नियुक्तियों की जांच के निर्देश दिए हैं। ब्रिगेडियर पाहवा ने बताया कि सरकार ने पांच जुलाई 2016 को शासनादेश जारी कर गैर सैन्य पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने कहा कि कोर्ट का आदेश या अन्य कोई विशेष परिस्थितियों को छोड़कर अन्य सभी गैर सैन्य पृष्ठभूमि वाले कर्मियों का अनुबंध समाप्त कर उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा।