यूपी और उत्तराखंड जल विवाद के मामलों को आपसी सहमति के आधार पर निपटाएंगे। जिन मामलों पर सहमति नहीं बन सकेगी उसे ही गंगा मैनेजमेंट बोर्ड में लाया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद दोनों राज्यों ने मिलकर गंगा मैनेजमेंट बोर्ड का गठन कर लिया है। यह बोर्ड गंगा और उसकी सहायक नदियों के जल पर यूपी और उत्तराखंड की हिस्सेदारी पर नजर रखेगा। अगर जल बंटवारे को लेकर कोई विवाद होगा तो उसका हल बोर्ड निकालेगा।
नैनीताल हाईकोर्ट ने छह दिसंबर 2016 को दोनों राज्यों की सरकारों को आदेश दिया था कि तीन महीने के अंदर गंगा मैनेजमेंट बोर्ड का गठन किया जाए। कोर्ट ने कहा था कि बोर्ड न होने से गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर दुविधा है। इस वजह से उत्तराखंड के किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। हाल ही में दिल्ली में दोनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें गंगा मैनेजमेंट बोर्ड का गठन कर दिया गया।
बैठक में तय हुआ कि बोर्ड का मुख्यालय दिल्ली के ओखला में होगा। ओखला में यूपी सरकार की जमीन है वहां पर बोर्ड का दफ्तर बनाया जाएगा। बोर्ड का चेयरमैन केंद्र सरकार द्वारा नामित होगा। इसके अलावा बोर्ड में दो पूर्णकालिक सदस्य होंगे, जिसमें एक-एक सदस्य दोनों राज्यों का होगा। बोर्ड में चार अंशकालिक सदस्य होंगे, इसमें दो-दो सदस्य दोनों राज्यों के होंगे। इसके अलावा बोर्ड में केंद्र सरकार द्वारा दो अधिकारियों की तैनाती की जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक गंगा मैनेजमेंट बोर्ड का गठन कर दिया गया है। फैसला लिया गया है यूपी-उत्तराखंड के बीच गंगा और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे का विवाद आपसी सहमति के आधार पर निपटाया जाएगा, जिन मामलों पर सहमति नहीं बन सकेगी उसे बोर्ड में लाया जाएगा।
- आनंद बर्द्धन, प्रमुख सचिव सिंचाई
नेशनल वाटर फ्रेमवर्क लॉ के लिए उमा ने मांगा सहयोग
केंद्रीय जल संसाधन मंत्री उमा भारती ने नेशनल वाटर फ्रेमवर्क लॉ के लिए सभी राज्यों से सहयोग मांगा है। उन्होंने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र भेजकर विधानसभा में इस आशय का प्रस्ताव पारित करने को कहा है। उमा भारती ने इसको लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को भी पत्र भेजा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सकारात्मक सहयोग की उम्मीद जताते हुए कहा कि जल संसाधन की सुरक्षा को लेकर बनने वाले इस कानून में उत्तराखंड का समर्थन अपेक्षित है। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री देश में पानी उपलब्धता कम होने पर चिंता जताई है। उन्होंने पत्र में कहा है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाए रखने के उद्देश्य से नेशनल वाटर फ्रेमवर्क लॉ बनाया जा रहा है।