उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड रोडवेस बस विवाद की गाज संभागीय परिवहन अधिकारी दिनेश चंद्र पठोई पर गिरी है।
राजीव मेहरा होंगे नए आरटीओ
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद उन्हें परिवहन मुख्यालय में अटैच कर दिया गया है। उनके स्थान पर राजीव मेहरा अब संभाग के नए आरटीओ होंगे। बीते मंगलवार रात को संभागीय परिवहन विभाग ने यूपी की बसों के कागजात चेक करने शुरू किए थे।
नियमों के विपरीत और तय फेरे से ज्यादा संचालित होने के आरोप में टीम ने 17 बसों को सीज कर दिया था। यह बात जब यूपी परिवहन निगम को पता चली तो उन्होंने भी आरटीओ के सहयोग से उत्तराखंड की 78 बसें विभिन्न इलाकों में सीज कर दी।
इससे हड़कंप मच गया। उत्तराखंड ने यूपी की बसें तो छोड़ दी, लेकिन यूपी ने उत्तराखंड की बसें शनिवार तक नहीं छोड़ी। मामला मुख्यमंत्री हरीश रावत के संज्ञान में आया। उन्होंने इस संबंध में यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से वार्ता की।
इसके बाद रविवार को सभी बसें छोड़ी गई। एक साथ 78 बसों के सीज होने से उत्तराखंड परिवहन निगम को लाखों रुपयों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
बिना ठोस अनुबंध संचालन
यूपी और उत्तराखंड के बीच रोडवेज बसों के संचालन को लेकर ठोस अनुबंध नहीं है। नवंबर 2009 में दोनों राज्यों के अधिकारी दून में अनुबंध के लिए बैठे थे। सहमति भी बन गई थी, लेकिन बाद में यूपी ने अनुबंध मानने से इंकार कर दिया। उसके बाद पूरी व्यवस्था राम भरोसे चल रही थी।
कार्रवाई से बढ़ा विवाद
संभागीय परिवहन अधिकारी ने बिना किसी को भरोसे में लिए यूपी की बसों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी। बस उसके बाद विवाद शुरू हो गया। पूरा विवाद मुख्यमंत्री हरीश रावत के पास पहुंचा।
उन्होंने जांच के आदेश दिए। जांच में आरटीओ देहरादून की गलती सामने आने पर शनिवार रात को ही मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें मुख्यालय में अटैच करने के आदेश दे दिए।