देहरादून। ऊर्जा निगमों के कर्मचारियों को मिलने वाली सस्ती बिजली के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर होने के बाद मामले में तीनों निगमों में हड़कंप है। मामले में कर्मचारियों संगठनों के साथ ही तीनों निगमों के प्रबंध निदेशकों की लगातार बैठकें हो रही हैं। मंगलवार को भी इस संबंध में विभिन्न कर्मचारी संगठनों और तीनों निगमों के प्रबंधक निदेशकों की बैठक हुई।
बैठक में कर्मचारियों ने कहा कि यूपी का फार्मूला उन्हें मंजूर नहीं है, जबकि रेट रिवाइज करने के लिए सभी कर्मचारी संगठन सहमत हैं। कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि जब भी इस संबंध में निर्णय हो कर्मचारी संगठनों से बातचीत की जाए। इस मामले में तीनों निगमों के प्रबंधक निदेशकों की जल्द ही बैठक आयोजित की जाएगी।
बता दें, यूपीसीएल की ओर से तीनों निगमों के कर्मचारियों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। जिस पर हाईकोर्ट ने तीनों निगमों को इस पर संपूर्ण ब्यौरा दिए जाने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तीनों निगम प्रबंधनों सहित कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है। मामले में कर्मचारी संगठन और निगम प्रबंधन लगातार बैठकें कर रहे हैं। सोमवार को तीनों निगमों के प्रबंधक निदेशकों की बैठक हुई थी। मंगलवार को यूपीसीएल और पिटकुल के प्रबंध निदेशकों के साथ कर्मचारी संगठनों की बैठक हुई। इसमें सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध करने पर चर्चा हुई और दोनों पक्षों ने इस पर अपने सुझाव दिए। इससे पहले यूपी की तर्ज कर कर्मचारियों को सस्ती बिजली देने का चर्चा थी, जिसे कर्मचारियों ने ठुकरा दिया। कहा कि यूपी का फार्मूला उन्हें मंजूर नहीं है। उत्तराखंड ऊर्जा कामगार संगठन के कार्यवाहक अध्यक्ष दीपक बेनीवाल ने बताया कि जल्द ही इस संबंध में तीनों निगमों के प्रबंधक निदेशकों की बैठक आयोजित की जाएगी। इसके बाद अंतिम फैसला होगा। बैठक में ऊर्जा कामगार संगठन के अध्यक्ष राकेश शर्मा, उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संयोजक इंसारुल हक, प्रदीप कंसल, ऊर्जा ऑफिसर्स सुपरवाइजर एसोसिएशन के अध्यक्ष डीसी गुरुरानी, वाईएस तोमर, रविंद्र सैनी, केहर सिंह, पंकज सैनी, डीसी ध्यानी सहित विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे।