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यूपी में आरटीआई का दुरुपयोग करने वाले आदतन मुकदमेबाज घोषित, पढ़ें क्या है पूरा मामला

Mon, 09 Dec 2019 10:14 AM IST
अलका त्यागी चंद्रेश पांडे, अमर उजाला, नैनीताल 

सार

  • आयोग की इस कार्रवाई से यूपी में कम हुआ आरटीआई का दुरुपयोग
  • उप्रेती की कोर्ट में हर दिन होती है पचास से अधिक मामलों की सुनवाई
  • यूपी के राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती पहुंचे उत्तराखंड
     
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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सूचना अधिकार अधिनियम (आरटीआई) की आड़ में सरकारी अधिकारियों को ब्लैकमेल करने अथवा लोकसेवकों का उत्पीड़न करने वाले आरटीआई कार्यकर्ताओं को यूपी के राज्य सूचना आयुक्त ने न केवल आदतन मुकदमेबाज घोषित किया है, बल्कि लिखित कार्रवाई में भी उनके नाम के आगे आदतन मुकदमेबाज लिखा जाता है। आयोग के इस प्रयोग से यूपी में आरटीआई का दुरुपयोग कम हुआ है। यह कहना है यूपी के राज्य सूचना आयुक्त अजय कुमार उप्रेती का। 

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शनिवार को तीन दिनी प्रवास पर नैनीताल पहुंचे उप्रेती राज्य अतिथि गृह में अमर उजाला से बातचीत कर रहे थे। एक सवाल के जवाब में उप्रेती ने बताया कि आदतन मुकदमेबाज ऐसे लोगों की फाइल में लिखा जाता है जिनकी रुचि सूचना मांगने की न होकर अधिकारियों पर दंड लगवाने या निजी कारणों के चलते उनका उत्पीड़न करने की होती है।

 

उन्होंने बताया कि यूपी में बड़े शहरों की अपेक्षा ग्रामीण आरटीआई के प्रति बेहद जागरूक हैं। वह हर दिन अपनी कोर्ट एस-6 में औसतन पचास मामलों का निस्तारण करते हैं। महीने में 1200 से अधिक मामले निस्तारित होते हैं।

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बताया कि दूरदराज के लोगों को आयोग के कार्यालय में आने में होने वाली दिक्कतों को देखते हुए देवीपाटन और अयोध्या मंडल के आठ जिलों में आयोग ने स्वयं जिला स्तर पर जाकर मामलों का निस्तारण किया।
 
उप्रेती ने बताया कि लोगों को आरटीआई के प्रति जागरूक करने के लिए अब वह स्वयं गांवों में जाकर चौपाल लगाएंगे। उप्रेती मूल रूप से अल्मोड़ा जिले के रहने वाले हैं और राज्य सूचना आयुक्त का कार्यभार संभालने से पहले लगभग तीस साल तक पत्रकारिता में सक्रिय रहे चुके हैं।

पेड़ लगाने का दिया सांकेतिक दंड
अजय कुमार उप्रेती का कहना है कि दस्तावेजों के उपलब्ध न होने पर चाहकर भी सूचना न देने वाले लोक सूचना अधिकारियों पर जुर्माना लगाने की बजाय उनको पेड़ लगाने का सांकेतिक दंड दिया जा रहा है, इससे पर्यावरण संरक्षण भी हो रहा है।
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