शौचालय में प्रसव होने की सूचना से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। सीएमएस डॉ. बीसी रमोला ने तुरंत जांच कराई कि कहीं अस्पताल के स्तर पर गर्भवती के उपचार और देखरेख में लापरवाही से यह स्थिति पैदा तो नहीं हुई।
लेकिन, ऐसी कोई बात सामने नहीं आई। महिला डॉक्टरों ने जच्चा-बच्चा दोनों को भर्ती कर उपचार शुरू किया। युवती अपना नाम पता बताने को तैयार नहीं हुई। इस पर अस्पताल की ओर से पुलिस को सूचना दी।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि युवती दूसरे जिले से आकर दून में परिचितों के साथ रहकर बीएड कर रही थी। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. प्रवीण पंवार ने बताया कि युवती के पास कुछ अन्य अस्पतालों के पर्चे भी मिले हैं। वह बच्चे को नहीं रखना चाहती। पुलिस को इसकी सूचना दे दी गई है।